अमेरिका-भारत के बीच हुए व्यापार समझौते के बाद विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारतीय शेयर बाजार में मजबूत खरीदारी शुरू की है। 3 फरवरी को FII ने 5,236 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया, जो अक्टूबर 2025 के बाद सबसे ज्यादा है। समझौते में अमेरिका ने भारतीय सामानों पर टैरिफ 25% से घटाकर 18% किया, जिससे निर्यातकों को राहत मिली और बाजार में तेजी आई। रुपया मजबूत हुआ और शेयर बाजार में राहत की लहर दौड़ी। यदि यह रुझान जारी रहा तो FII की और मजबूत वापसी से निफ्टी और सेंसेक्स में नई ऊंचाइयां संभव हैं।
अमेरिका-भारत ट्रेड डील: टैरिफ में कटौती और FII की वापसी
अमेरिका और भारत के बीच हुए नए व्यापार समझौते ने वैश्विक निवेशकों का ध्यान खींचा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि भारतीय निर्यात पर लगने वाला पारस्परिक टैरिफ 25% से घटाकर 18% कर दिया गया है। यह फैसला भारत की रूस से तेल खरीद को लेकर लगाए गए दंडात्मक शुल्क को हटाने से जुड़ा है। भारत ने रूस से तेल आयात कम करने पर सहमति जताई, जिससे अमेरिका ने टैरिफ में राहत दी। इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को खास फायदा होगा, खासकर टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, आईटी और ऑटो पार्ट्स जैसे क्षेत्रों में।
समझौते के तुरंत बाद बाजार में सकारात्मक असर दिखा। 3 फरवरी को FII ने नकद खंड में 5,236 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की, जबकि DII ने 1,014 करोड़ रुपये की खरीदारी की। यह आंकड़ा जनवरी 2026 में FII की भारी बिकवाली के बाद बड़ा बदलाव है। जनवरी के पहले 16 दिनों में FII ने 22,529 करोड़ रुपये निकाले थे, लेकिन अब ट्रेड डील की वजह से निवेशकों का भरोसा लौट रहा है। रुपया मजबूत हुआ और शेयर बाजार में राहत रैली देखी गई।
FII की हालिया गतिविधि और बाजार पर असर
जनवरी 2026 में FII ने कुल मिलाकर भारी बिकवाली की थी, जिससे निफ्टी में 2.78% तक गिरावट आई। लेकिन ट्रेड डील की खबर के साथ फरवरी की शुरुआत में ही रुख पलट गया। विशेषज्ञों का मानना है कि टैरिफ में कटौती से भारत के निर्यात बढ़ेंगे, जिससे डॉलर की मांग कम होगी और रुपया और मजबूत हो सकता है। इससे FII के लिए भारत आकर्षक बनेगा।
यहां हाल के दिनों की FII-DII गतिविधि का संक्षिप्त विवरण:
3 फरवरी 2026 : FII शुद्ध खरीदार – 5,236 करोड़ रुपये
जनवरी 2026 (पहले 16 दिन) : FII शुद्ध विक्रेता – 22,529 करोड़ रुपये
2025 पूरा साल : FII ने कुल 1.6 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा निकाले
यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2025 में FII की बिकवाली से FII की हिस्सेदारी NSE कंपनियों में 16.7% के 15 साल के निचले स्तर पर पहुंच गई थी। अब ट्रेड डील से अनिश्चितता कम होने से FII की वापसी तेज हो सकती है।
किन सेक्टर्स को सबसे ज्यादा फायदा?
समझौते से कई सेक्टरों में तेजी की उम्मीद है:
फार्मा और हेल्थकेयर : अमेरिकी बाजार में भारतीय जेनेरिक दवाओं की मांग बढ़ेगी।
आईटी और टेक्नोलॉजी : टैरिफ राहत से सॉफ्टवेयर निर्यात आसान होगा।
टेक्सटाइल और गारमेंट्स : कपड़ा निर्यात में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
ऑटो और इंजीनियरिंग : पार्ट्स निर्यात से लाभ।
एनर्जी और कमोडिटी : रूस से तेल आयात कम होने से अमेरिकी ऊर्जा आयात बढ़ सकता है।
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि समझौते में संवेदनशील कृषि और डेयरी क्षेत्रों को बाहर रखा गया है, इसलिए किसानों के हित सुरक्षित हैं।
शेयर बाजार पर आगे का नजरिया
ट्रेड डील से अनिश्चितता खत्म होने से बाजार में स्थिरता आएगी। यदि FII की खरीदारी जारी रही तो निफ्टी जल्द ही नई रिकॉर्ड ऊंचाई छू सकता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2026 में FII की वापसी से बाजार में 10-15% तक की तेजी संभव है। हालांकि, वैश्विक कारकों जैसे अमेरिकी ब्याज दरें और भू-राजनीतिक तनाव पर भी नजर रखनी होगी।
यह समझौता भारत की वैश्विक अर्थव्यवस्था में मजबूत स्थिति को दर्शाता है। यदि FII की यह रफ्तार बनी रही तो भारतीय शेयर बाजार में नई तेजी की लहर दौड़ सकती है।
Disclaimer: यह लेख समाचार संकलन और विश्लेषण पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी निवेश सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले विशेषज्ञ सलाह लें।










