“यह लेख भारत और पाकिस्तान की बजट प्रक्रियाओं की तुलना करता है, जहां भारत फरवरी में बजट पेश करके आर्थिक योजनाओं को जल्दी लागू करता है, जबकि पाकिस्तान जून में करता है। इसमें दोनों देशों के वित्तीय वर्ष, प्रक्रियाओं के अंतर, आर्थिक प्रभाव और ऐतिहासिक बदलावों पर चर्चा है, साथ ही तुलनात्मक आंकड़ों के साथ।”
भारत और पाकिस्तान की बजट प्रक्रियाओं में अंतर
भारत में केंद्रीय बजट की प्रस्तुति हर साल 1 फरवरी को होती है, जो वित्तीय वर्ष की शुरुआत से दो महीने पहले होती है। इससे सरकार को संसद से अनुमोदन प्राप्त करने और अप्रैल से नई योजनाओं को लागू करने का पर्याप्त समय मिलता है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 2026-27 का बजट 1 फरवरी को पेश करेंगी, जो रविवार पड़ने के बावजूद तय तारीख पर होगा। बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा, जिसमें आर्थिक सर्वेक्षण और विभिन्न क्षेत्रों के लिए आवंटन पर चर्चा होगी।
पाकिस्तान में बजट प्रक्रिया अलग है, जहां वित्तीय वर्ष 1 जुलाई से 30 जून तक चलता है। वहां बजट आमतौर पर जून के पहले या दूसरे सप्ताह में पेश किया जाता है, जैसे 2025-26 का बजट 10 जून को प्रस्तुत हुआ था। 2026-27 के लिए बजट जून 2026 में आएगा, जो भारत से करीब चार महीने बाद है। पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में बजट पास होने के बाद जुलाई से लागू होता है, लेकिन राजनीतिक अस्थिरता और आईएमएफ जैसे अंतरराष्ट्रीय दबाव अक्सर इसमें देरी का कारण बनते हैं।
दोनों देशों के वित्तीय वर्ष और बजट समय-सारणी की तुलना
नीचे दी गई तालिका दोनों देशों की बजट प्रक्रियाओं के प्रमुख अंतर दर्शाती है:
| पैरामीटर | भारत | पाकिस्तान |
|---|---|---|
| वित्तीय वर्ष | 1 अप्रैल से 31 मार्च | 1 जुलाई से 30 जून |
| बजट प्रस्तुति तिथि | 1 फरवरी (2026 में रविवार को) | जून का पहला/दूसरा सप्ताह (2026 में जून में) |
| बजट सत्र की अवधि | जनवरी से अप्रैल (2026 में 28 जनवरी से 2 अप्रैल) | मई-जून (आर्थिक सर्वेक्षण जून की शुरुआत में) |
| प्रमुख दस्तावेज | आर्थिक सर्वेक्षण, मध्यम अवधि वित्तीय नीति, व्यय बजट | आर्थिक सर्वेक्षण, मध्यम अवधि बजटीय ढांचा, विकास व्यय |
| ऐतिहासिक बदलाव | 2017 से फरवरी में शिफ्ट, पहले जुलाई में था | ब्रिटिश काल से जून में, कोई बड़ा बदलाव नहीं |
यह तुलना दिखाती है कि भारत की प्रक्रिया अधिक पूर्वानुमानित और समयबद्ध है, जबकि पाकिस्तान में बजट अक्सर चुनावी चक्र या आर्थिक संकट से प्रभावित होता है।
आर्थिक प्रभाव और चुनौतियां
भारत की जल्दी बजट प्रस्तुति से निवेशक और व्यवसायी अप्रैल से ही नई कर नीतियों और सब्सिडी पर अमल कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, 2026 बजट में जीएसटी सुधार, इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस की उम्मीद है, जो जीडीपी ग्रोथ को 7-8% तक पहुंचाने में मदद करेगा। पाकिस्तान में देरी से बजट आने से आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है, जैसे 2025-26 बजट में आईएमएफ लोन के लिए कर वृद्धि और सब्सिडी कटौती की गई, जिससे मुद्रास्फीति 15% से ऊपर पहुंच गई।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में विदेशी मुद्रा भंडार की कमी और कर्ज का बोझ बजट प्रक्रिया को जटिल बनाता है। वहां वित्त मंत्री अक्सर मई में आईएमएफ से चर्चा के बाद जून में बजट अंतिम रूप देते हैं, जबकि भारत में बजट पूर्व सर्वेक्षण और स्टेकहोल्डर परामर्श जनवरी से ही शुरू हो जाते हैं।
प्रमुख अंतर के कारण
ऐतिहासिक विरासत : भारत ने ब्रिटिश काल की जुलाई बजट परंपरा को 2017 में बदलकर फरवरी कर दिया, ताकि मानसून प्रभाव से बचा जा सके। पाकिस्तान अभी भी जून परंपरा पर कायम है।
राजनीतिक स्थिरता : भारत में बहुमत सरकार बजट को समय पर पास कराती है, जबकि पाकिस्तान में गठबंधन सरकारें और विरोधी दल अक्सर बहस को लंबा खींचते हैं।
अंतरराष्ट्रीय दबाव : पाकिस्तान का बजट आईएमएफ और विश्व बैंक से जुड़ा होता है, जो देरी का कारण बनता है। भारत स्वतंत्र रूप से नीतियां बनाता है।
आर्थिक पैमाना : भारत की जीडीपी 4 ट्रिलियन डॉलर से ऊपर है, जबकि पाकिस्तान की 350 बिलियन डॉलर के आसपास, जिससे भारत में बजट प्रक्रिया अधिक संसाधनपूर्ण है।
बजट में प्रमुख क्षेत्रों की तुलना
दोनों देशों के बजट में रक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य पर फोकस रहता है, लेकिन आवंटन में अंतर है। नीचे की सूची प्रमुख क्षेत्रों की तुलना दिखाती है (2025-26 के आंकड़ों पर आधारित अनुमान):
रक्षा : भारत में 6 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा, पाकिस्तान में 18 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपये (करीब 50 बिलियन डॉलर), जो पाकिस्तान की जीडीपी का बड़ा हिस्सा है।
शिक्षा : भारत 1.2 लाख करोड़ रुपये, पाकिस्तान 1.2 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपये (करीब 4 बिलियन डॉलर), जहां पाकिस्तान में साक्षरता दर 60% से कम है।
स्वास्थ्य : भारत 90 हजार करोड़ रुपये, पाकिस्तान 20 हजार करोड़ पाकिस्तानी रुपये, जो महामारी के बाद पाकिस्तान की चुनौतियों को दर्शाता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर : भारत सीएपीईएक्स पर 11 लाख करोड़ रुपये, पाकिस्तान विकास व्यय पर 12 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपये, लेकिन निष्पादन में पाकिस्तान पीछे है।
कर संग्रह : भारत जीएसटी और इनकम टैक्स से 30 लाख करोड़ रुपये, पाकिस्तान एफबीआर से 9 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपये, जहां कर चोरी पाकिस्तान में बड़ी समस्या है।
बजट प्रक्रिया के चरण
भारत में बजट प्रक्रिया इस प्रकार है:
वित्त मंत्रालय सर्कुलर जारी करता है, मंत्रालयों से प्रस्ताव मांगता है।
प्री-बजट मीटिंग्स में स्टेकहोल्डर्स से इनपुट।
आर्थिक सर्वेक्षण 31 जनवरी को पेश।
1 फरवरी को बजट भाषण।
लोकसभा और राज्यसभा में चर्चा, फिर पास।
पाकिस्तान में:
मई में आर्थिक सर्वेक्षण की तैयारी।
आईएमएफ से परामर्श।
जून में बजट पेश, जिसमें विकास लक्ष्य और कर प्रस्ताव।
नेशनल असेंबली में बहस, संशोधन।
जुलाई से लागू, लेकिन अक्सर सप्लीमेंट्री ग्रांट्स की जरूरत पड़ती है।
आर्थिक विकास पर प्रभाव
भारत की समयबद्ध प्रक्रिया से विदेशी निवेश बढ़ता है, जैसे एफडीआई 80 बिलियन डॉलर तक पहुंचा। पाकिस्तान में देरी से निवेशक हिचकिचाते हैं, जिससे जीडीपी ग्रोथ 3-4% पर अटकी है। दोनों देशों में मुद्रास्फीति नियंत्रण बजट का प्रमुख लक्ष्य है, लेकिन पाकिस्तान में खाद्य मुद्रास्फीति 20% से ऊपर रहती है।
संभावित सुधार सुझाव
पाकिस्तान बजट को मई में शिफ्ट कर सकता है, ताकि जुलाई से पहले योजना बने। भारत डिजिटल बजट को और मजबूत कर रहा है, जैसे ई-बिल सिस्टम। दोनों देशों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ओपन डेटा पोर्टल उपयोगी होंगे।
Disclaimer: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर आधारित है और केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यह वित्तीय सलाह का गठन नहीं करता है।










