“भारत ने रूस से तेल आयात घटाकर ब्राजील के पेट्रोब्रास से 71,639,093,292 रुपये की डील की है, जिसमें 12 मिलियन बैरल क्रूड ऑयल खरीदा जाएगा। यह कदम रूसी तेल पर निर्भरता कम करने और वैश्विक बाजार में बेहतर सौदों की तलाश का हिस्सा है, जबकि अमेरिकी दबाव के बीच ट्रंप प्रशासन की रणनीति प्रभावित हो सकती है।”
भारत की नई तेल रणनीति: रूस से दूरी, ब्राजील से करीबी
भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए रूस से तेल आयात में कटौती की है और ब्राजील के साथ एक बड़ी डील फाइनल की है। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने ब्राजील की सरकारी कंपनी पेट्रोब्रास से 12 मिलियन बैरल क्रूड ऑयल खरीदने का समझौता किया है, जिसकी कुल कीमत 71,639,093,292 रुपये आंकी गई है। यह डील वित्त वर्ष 2027 के लिए है और भारत एनर्जी वीक 2026 में साइन की जाएगी। रूसी तेल आयात में गिरावट के साथ, भारत अब मिडिल ईस्ट, अफ्रीका और साउथ अमेरिका से अधिक तेल खरीद रहा है, जिससे वैश्विक तेल बाजार में नई गतिशीलता पैदा हो रही है।
रूसी तेल पर भारत की निर्भरता 2022 में यूक्रेन युद्ध के बाद चरम पर पहुंची थी, जब भारत ने सस्ते रूसी क्रूड का बड़ा हिस्सा खरीदा। लेकिन हालिया महीनों में रूसी आयात दिसंबर में दो साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया, जिससे OPEC देशों का शेयर 11 महीने के उच्चतम स्तर पर आ गया। भारतीय रिफाइनर अब Angola, UAE और Brazil से तेल खरीद रहे हैं। Indian Oil Corporation ने मार्च लोडिंग के लिए 7 मिलियन बैरल तेल खरीदा, जिसमें ब्राजील का हिस्सा प्रमुख है। यह बदलाव रूसी तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और लॉजिस्टिक्स चुनौतियों से प्रेरित है।
तेल आयात में बदलाव की मुख्य वजहें
भू-राजनीतिक दबाव : अमेरिका के नेतृत्व में पश्चिमी देश रूस पर प्रतिबंध बढ़ा रहे हैं, जिससे भारत को वैकल्पिक स्रोत तलाशने पड़ रहे हैं। ट्रंप प्रशासन की सख्त नीतियां रूसी तेल खरीद को मुश्किल बना सकती हैं।
कीमत लाभ : ब्राजील का क्रूड रूसी उरल ग्रेड से प्रतिस्पर्धी है, जिसमें सल्फर कंटेंट कम होने से रिफाइनिंग आसान होती है।
विविधीकरण : भारत अपनी 90% से अधिक तेल जरूरतों को आयात करता है, इसलिए एक स्रोत पर निर्भरता जोखिम भरा है। नई डील से ऊर्जा मिक्स मजबूत होगा।
पर्यावरणीय विचार : ब्राजील का तेल कम कार्बन इंटेंसिव हो सकता है, जो भारत की नेट-जीरो लक्ष्यों से मेल खाता है।
डील की विस्तृत जानकारी
| पैरामीटर | विवरण |
|---|---|
| कुल राशि | 71,639,093,292 रुपये (लगभग 863 मिलियन USD) |
| तेल की मात्रा | 12 मिलियन बैरल क्रूड ऑयल |
| स्रोत देश | ब्राजील (पेट्रोब्रास) |
| खरीदार | भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) |
| समयावधि | वित्त वर्ष 2027 |
| साइनिंग इवेंट | भारत एनर्जी वीक 2026 |
| तुलनात्मक आयात | पिछले साल की तुलना में दोगुना (पिछली डील 6 मिलियन बैरल की थी) |
यह डील भारत के तेल मंत्री के बयान से मेल खाती है, जिसमें कहा गया कि रूसी आयात कम होने से बेहतर सौदे उपलब्ध हो रहे हैं। BPCL की यह खरीदारी पिछले साल की ब्राजील डील से दोगुनी है, जो दर्शाता है कि भारत साउथ अमेरिकी बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। ब्राजील का तेल मुख्य रूप से Atlantic बेसिन से आता है, जो शिपिंग कॉस्ट को कम करता है।
ट्रंप प्रशासन पर प्रभाव
ट्रंप की “America First” नीति के तहत रूस पर सख्ती बढ़ सकती है, लेकिन भारत की यह डील अमेरिकी हितों से टकरा सकती है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी ने हाल ही में भारत के रूसी तेल आयात कम होने पर टैरिफ राहत का संकेत दिया था, लेकिन ब्राजील जैसे नए स्रोतों से खरीदारी ट्रंप की ऊर्जा निर्यात रणनीति को चुनौती देगी। अमेरिका खुद ब्राजील से प्रतिस्पर्धा करता है, और भारत का यह कदम वैश्विक तेल व्यापार में नई संतुलन पैदा करेगा। ट्रंप की टीम भारत को रूसी तेल से दूर करने की कोशिश कर रही है, लेकिन ब्राजील डील से अमेरिकी प्रभाव कमजोर पड़ सकता है।
आर्थिक प्रभाव
यह डील भारत की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव डालेगी। तेल कीमतों में गिरावट से ऊर्जा निवेश प्रभावित हो सकता है, लेकिन विविध स्रोतों से खरीदारी मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखेगी। BPCL की रिफाइनिंग क्षमता 35 मिलियन टन प्रति वर्ष है, और नया तेल इसकी दक्षता बढ़ाएगा। ब्राजील से आयात बढ़ने से द्विपक्षीय व्यापार 15 बिलियन USD से ऊपर जा सकता है। साथ ही, यह भारत की विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करेगा, क्योंकि ब्राजील डील डॉलर-आधारित है लेकिन कीमतें प्रतिस्पर्धी हैं।
रणनीतिक महत्व
भारत अब अफ्रीकी देशों जैसे Angola से भी तेल खरीद रहा है, जहां Indian Oil ने हालिया खरीदारी की है। UAE के साथ लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाए जा रहे हैं। यह सब रूसी आयात में 20-25% की गिरावट के संदर्भ में है। ब्राजील डील से भारत लैटिन अमेरिका में अपनी उपस्थिति मजबूत करेगा, जो BRICS सहयोग का हिस्सा है। पेट्रोब्रास की उत्पादन क्षमता 3 मिलियन बैरल प्रति दिन है, और भारत इसका बड़ा हिस्सा ले सकता है।
संभावित चुनौतियां
लॉजिस्टिक्स : ब्राजील से शिपिंग समय लंबा है, लेकिन Panama Canal के माध्यम से यह प्रबंधनीय है।
कीमत उतार-चढ़ाव : Brent crude की कीमतें 70-80 USD प्रति बैरल के आसपास हैं, जो डील को प्रभावित कर सकती हैं।
पर्यावरणीय चिंताएं : ब्राजील के Amazon क्षेत्र में ड्रिलिंग विवादास्पद है, लेकिन भारत सस्टेनेबल स्रोतों पर फोकस कर रहा है।
राजनीतिक जोखिम : ट्रंप की संभावित सैंक्शन से भारत को सतर्क रहना होगा।
यह डील भारत की ऊर्जा नीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जो विविधीकरण और स्थिरता पर जोर देती है। BPCL के अलावा अन्य PSU जैसे HPCL और IOCL भी इसी राह पर हैं।
Disclaimer: यह समाचार रिपोर्ट स्रोतों से प्राप्त जानकारी और टिप्स पर आधारित है।










