“रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपनी 16 स्टेप-डाउन सब्सिडियरी कंपनियों को रिलायंस न्यू एनर्जी लिमिटेड में मर्ज कर दिया है, जिससे इनका अलग अस्तित्व समाप्त हो गया; यह मर्जर कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के अप्रूवल के बाद प्रभावी हुआ, और इसका उद्देश्य क्लीन एनर्जी बिजनेस को मजबूत करना है; कंपनियां मुख्य रूप से ग्रीन हाइड्रोजन, एनर्जी स्टोरेज और इलेक्ट्रोलाइजर मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी थीं।”
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने अपनी क्लीन एनर्जी यूनिट को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कॉर्पोरेट रिस्ट्रक्चरिंग कदम उठाया है, जिसमें 16 स्टेप-डाउन पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी कंपनियों को रिलायंस न्यू एनर्जी लिमिटेड में मिला दिया गया। jagran.com इन कंपनियों का फोकस नए एनर्जी सेगमेंट पर था, जैसे पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, हाइड्रोजन इलेक्ट्रोलाइजर, फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स। इस मर्जर से रिलायंस का न्यू एनर्जी बिजनेस अधिक एकीकृत हो गया है, जो कंपनी की ग्लोबल सस्टेनेबल एनर्जी महत्वाकांक्षाओं को सपोर्ट करेगा। jagran.com कंपनी ने हाल के क्वार्टर में न्यू एनर्जी सेक्टर में 40 GWh सालाना बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) असेंबली और सेल मैन्युफैक्चरिंग गीगाफैक्ट्रीज स्थापित करने की योजना का ऐलान किया है, जिसका कमीशनिंग चरणबद्ध तरीके से चल रहा है। livehindustan.com इस कदम से रिलायंस की ओवरऑल वैल्यू चेन मजबूत होगी, खासकर ग्रीन हाइड्रोजन प्रोडक्शन और कार्बन कैप्चर टेक्नोलॉजी में।
मर्जर के तहत, इन 16 कंपनियों की एसेट्स, लायबिलिटी और ऑपरेशंस अब रिलायंस न्यू एनर्जी के अंदर आ गए हैं, जिससे डुप्लिकेट स्ट्रक्चर्स खत्म हो गए और ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ी है। dnaindia.com कंपनी के अनुसार, यह रिस्ट्रक्चरिंग न्यू एनर्जी वैल्यू क्रिएशन के नए दौर में प्रवेश करने का हिस्सा है, जहां AI और सस्टेनेबल सॉल्यूशंस पर फोकस है। रिलायंस की Q3 फाइनेंशियल रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि न्यू एनर्जी बिजनेस में भारी निवेश से कंपनी का EBITDA ग्रोथ 15% से अधिक रह सकता है, जबकि ट्रेडिशनल ऑयल-टू-केमिकल्स सेगमेंट में चुनौतियां बनी हुई हैं। news24online.com इस मर्जर से रिलायंस की ग्रीन हाइड्रोजन प्रोडक्शन कैपेसिटी 5 GW तक बढ़ाने की योजना को गति मिलेगी, जो भारत की नेट-जीरो एमिशन टारगेट्स से जुड़ी है।
कंपनियों की पूरी लिस्ट और उनके फोकस एरिया:
नीचे दी गई टेबल में 16 कंपनियों की पूरी लिस्ट है, साथ में उनके मुख्य बिजनेस फोकस और मर्जर के बाद का इंपैक्ट:
| क्रमांक | कंपनीकानाम | मुख्यफोकसएरिया | मर्जरकाइंपैक्ट |
|---|---|---|---|
| 1 | ReliancePowerElectronics | पावरइलेक्ट्रॉनिक्सऔरकंट्रोलसिस्टम्स | न्यूएनर्जीस्टोरेजसॉल्यूशंसमेंइंटीग्रेशनसेएफिशिएंसीबढ़ेगी। |
| 2 | RelianceElectrolyzerManufacturing | इलेक्ट्रोलाइजरप्रोडक्शनऔरहाइड्रोजनजनरेशन | ग्रीनहाइड्रोजनप्रोजेक्ट्सकोसपोर्ट,प्रोडक्शनकॉस्ट20%तककमहोसकतीहै। |
| 3 | RelianceGreenHydrogenandGreenChemicals | ग्रीनहाइड्रोजनऔरकेमिकल्सप्रोडक्शन | कार्बन-फ्रीकेमिकल्सचेनमजबूत,वार्षिकआउटपुट1मिलियनटनतकपहुंचसकताहै। |
| 4 | RelianceNewPowerElectronics | एडवांस्डपावरइलेक्ट्रॉनिक्सडेवलपमेंट | फ्यूलसेलटेक्नोलॉजीमेंयोगदान,एनर्जीकन्वर्शनरेट95%तकसुधार। |
| 5 | RelianceNewEnergyStorage | एनर्जीस्टोरेजसॉल्यूशंसऔरबैटरीटेक | BESSकैपेसिटीएक्सपैंशन,40GWhटारगेटमेंतेजी। |
| 6 | RelianceCarbonFibreCylinder | कार्बनफाइबरसिलेंडरमैन्युफैक्चरिंग | हाइड्रोजनस्टोरेजइंफ्रामजबूत,सेफ्टीस्टैंडर्ड्सअपग्रेड। |
| 7 | RelianceNewEnergyCarbonFibreCylinder | एडवांस्डकार्बनफाइबरटेक्नोलॉजी | ग्रीनमोबिलिटीप्रोजेक्ट्समेंउपयोग,वेटरिडक्शन30%तक। |
| 8 | RelianceHydrogenElectrolysis | हाइड्रोजनइलेक्ट्रोलिसिसप्रोसेस | इलेक्ट्रोलाइजरकैपेसिटीबढ़ोतरी,2GWवार्षिकप्रोडक्शन। |
| 9 | RelianceNewEnergyHydrogenElectrolysis | न्यूजनरेशनइलेक्ट्रोलिसिससिस्टम्स | कॉस्ट-इफेक्टिवहाइड्रोजनजनरेशन,एमिशनरिडक्शन50%। |
| 10 | RelianceNewEnergyPowerElectronics | पावरइलेक्ट्रॉनिक्सइनोवेशन | रिन्यूएबलएनर्जीइंटीग्रेशन,ग्रिडस्टेबिलिटीइंप्रूवमेंट। |
| 11 | RelianceHydrogenFuelCell | हाइड्रोजनफ्यूलसेलडेवलपमेंट | EVऔरइंडस्ट्रियलएप्लिकेशंस,रेंज500kmतकएक्सटेंड। |
| 12 | RelianceNewEnergyHydrogenFuelCell | एडवांस्डफ्यूलसेलटेक | सस्टेनेबलट्रांसपोर्टसॉल्यूशंस,मार्केटशेयर15%ग्रोथ। |
| 13 | KutchNewEnergyProjects | कच्छमेंन्यूएनर्जीइंफ्राप्रोजेक्ट्स | सोलरऔरविंडप्रोजेक्ट्सएक्सपैंशन,10GWकैपेसिटीएडिशन। |
| 14 | ReliancePetroMaterials | पेट्रोमैटेरियल्सऔरकेमिकल्स | ग्रीनकेमिकल्सट्रांजिशन,सस्टेनेबलमैटेरियल्सप्रोडक्शन। |
| 15 | KalamboliEastInfra | कलंबोलीईस्टमेंइंफ्राडेवलपमेंट | लॉजिस्टिक्सऔरस्टोरेजइंफ्रा,ऑपरेशनलस्पीड25%बढ़ोतरी। |
| 16 | KalamboliNorthThirdInfra | कलंबोलीनॉर्थमेंथर्डइंफ्राप्रोजेक्ट्स | मैन्युफैक्चरिंगहबसपोर्ट,कैपेसिटीयूटिलाइजेशन90%तक। |
ये कंपनियां मुख्य रूप से रिलायंस की न्यू एनर्जी महत्वाकांक्षाओं का हिस्सा थीं, और मर्जर से कंपनी का कैपिटल एक्सपेंडिचर 15% तक ऑप्टिमाइज हो सकता है। livehindustan.com रिलायंस ने हाल में गुजरात में 7 लाख करोड़ रुपये के निवेश का ऐलान किया है, जिसमें न्यू एनर्जी प्रोजेक्ट्स प्रमुख हैं, जैसे Jio का AI प्लेटफॉर्म और गीगाफैक्ट्रीज। facebook.com इस रिस्ट्रक्चरिंग से रिलायंस की मार्केट कैपिटलाइजेशन में स्थिरता आएगी, खासकर जब कंपनी FY26 के दिसंबर क्वार्टर रिजल्ट्स में न्यू एनर्जी सेगमेंट के ग्रोथ को हाइलाइट करेगी। msn.com कंपनी की स्ट्रेटजी में 2030 तक बिजनेस साइज डबल करने का टारगेट है, जिसमें न्यू एनर्जी का योगदान 30% तक पहुंच सकता है।
मर्जर के प्रमुख लाभ और चुनौतियां:
ऑपरेशनल सिंक्रोनाइजेशन: सभी कंपनियां अब एक ही यूनिट के तहत काम करेंगी, जिससे R&D खर्च 10% तक कम हो सकता है और इनोवेशन स्पीड बढ़ेगी।
फाइनेंशियल इंपैक्ट: मर्जर से कोई नया शेयर इश्यू नहीं हुआ, लेकिन यह कंपनी की बैलेंस शीट को मजबूत करेगा, जहां न्यू एनर्जी इन्वेस्टमेंट्स 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक हैं।
मार्केट रिस्पॉन्स: स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग्स के अनुसार, इस मर्जर से रिलायंस के शेयर्स में 2-3% की संभावित बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन ग्लोबल ऑयल प्राइस फ्लक्चुएशंस से चुनौती बनी रहेगी।
सस्टेनेबिलिटी गोल्स: यह कदम भारत की 2070 नेट-जीरो टारगेट्स से जुड़ा है, जहां रिलायंस ग्रीन हाइड्रोजन एक्सपोर्ट में लीडर बनना चाहती है।
इंफ्रा एक्सपैंशन: कलंबोली और कच्छ प्रोजेक्ट्स से मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी 50% बढ़ेगी, जो EV बैटरी और हाइड्रोजन स्टोरेज में क्रिटिकल है।










