“अदाणी ग्रुप ने अमेरिकी SEC के घूसखोरी आरोपों के खिलाफ रक्षा मजबूत करने के लिए रॉबर्ट गिउफ्रा जूनियर को नियुक्त किया, जो पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप के प्रमुख वकीलों में से एक हैं; स्टॉक में 14% गिरावट के बाद ग्रुप ने सफाई दी कि मामले में कोई नई कार्यवाही नहीं है; वकीलों ने 30 जनवरी तक समय मांगा ताकि ईमेल समन पर समझौता हो सके।”
अदाणी ग्रुप का अमेरिकी कानूनी संघर्ष
अदाणी ग्रुप ने अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) द्वारा लगाए गए घूसखोरी और धोखाधड़ी के आरोपों का सामना करने के लिए अपनी कानूनी टीम को मजबूत किया है। गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी पर नवंबर 2024 में दायर इस मामले में, SEC ने आरोप लगाया कि अदाणी ग्रुप ने भारत में सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए बिजली खरीद समझौतों में 265 मिलियन डॉलर की रिश्वत दी। इस मामले में अदाणी ने रॉबर्ट गिउफ्रा जूनियर को अपना प्रमुख वकील बनाया, जो सुलिवन एंड क्रॉमवेल फर्म के पार्टनर हैं और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इम्पीचमेंट ट्रायल में शामिल रहे हैं। गिउफ्रा की विशेषज्ञता बड़े वित्तीय और सरकारी जांच मामलों में है, जहां उन्होंने बैंक ऑफ अमेरिका और यूबर जैसी कंपनियों का प्रतिनिधित्व किया।
इस नियुक्ति का उद्देश्य SEC की जांच को चुनौती देना और अदालत में मजबूत बचाव पेश करना है। गिउफ्रा ने पहले ही SEC के साथ चर्चा शुरू की है, जिसमें समन की सेवा ईमेल के माध्यम से करने पर समझौता शामिल है। 23 जनवरी को जब SEC ने अमेरिकी अदालत से ईमेल समन की अनुमति मांगी, तो अदाणी ग्रुप के शेयरों में भारी गिरावट आई। अडानी एंटरप्राइजेज के शेयर 14% गिरकर 2,800 रुपये पर बंद हुए, जबकि अडानी ग्रीन एनर्जी में 12% की कमी आई, जिससे ग्रुप की कुल मार्केट वैल्यू में 13 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ।
कानूनी प्रक्रिया की प्रमुख समयरेखा
अदाणी मामले की प्रगति को समझने के लिए निम्नलिखित समयरेखा महत्वपूर्ण है:
| तिथि | घटना | प्रभाव |
|---|---|---|
| नवंबर 2024 | SEC ने गौतम अदाणी और सागर अदाणी पर घूसखोरी और धोखाधड़ी का सिविल केस दायर किया। | ग्रुप के शेयरों में प्रारंभिक गिरावट, लेकिन रिकवरी हुई। |
| जनवरी 2025 | अदाणी ग्रुप ने भारतीय अधिकारियों के माध्यम से समन अस्वीकार किया। | SEC ने वैकल्पिक सेवा के लिए अदालत का रुख किया। |
| 23 जनवरी 2026 | SEC ने ईमेल समन के लिए कोर्ट से अनुमति मांगी। | शेयर बाजार में पैनिक सेलिंग, 13 बिलियन डॉलर का नुकसान। |
| 25 जनवरी 2026 | अदाणी ग्रुप ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में सफाई दी कि कोई नई कार्यवाही नहीं है। | शेयरों में आंशिक रिकवरी, लेकिन अनिश्चितता बनी रही। |
| 27 जनवरी 2026 | वकीलों ने 30 जनवरी तक समय मांगा ताकि SEC से समझौता हो सके। | बाजार में सकारात्मक सेंटिमेंट, शेयर 5% ऊपर। |
| 30 जनवरी 2026 | अदालत को अपडेट देने की अंतिम तिथि। | संभावित समझौते से जीत की उम्मीद। |
इस समयरेखा से स्पष्ट है कि अदाणी की टीम प्रक्रियात्मक देरी का उपयोग करके मामले को कमजोर करने की रणनीति अपनाती नजर आ रही है। गिउफ्रा की भागीदारी से उम्मीद है कि SEC के आरोपों को सबूतों की कमी के आधार पर खारिज किया जा सके, क्योंकि आरोप मुख्य रूप से भारतीय सोलर कॉन्ट्रैक्ट्स पर आधारित हैं, जहां स्थानीय कानूनों का हवाला दिया जा सकता है।
आरोपों का विस्तृत विश्लेषण
SEC के अनुसार, अदाणी ग्रुप ने अडानी ग्रीन एनर्जी के बॉन्ड जारी करने के दौरान निवेशकों से झूठी जानकारी छिपाई। आरोप है कि 2021-2024 के बीच, ग्रुप ने आंध्र प्रदेश और अन्य राज्यों में सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए सरकारी अधिकारियों को रिश्वत दी, जिससे 2 बिलियन डॉलर के कॉन्ट्रैक्ट्स हासिल हुए। सागर अदाणी, जो अडानी ग्रीन के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं, पर साजिश रचने का सीधा आरोप है।
हालांकि, अदाणी ग्रुप ने इन आरोपों को निराधार बताया है। ग्रुप का कहना है कि सभी कॉन्ट्रैक्ट्स पारदर्शी थे और भारतीय रेगुलेटर्स से मंजूरी प्राप्त थे। गिउफ्रा की टीम अब सबूत जुटा रही है, जिसमें भारतीय ऊर्जा मंत्रालय के दस्तावेज और अंतरराष्ट्रीय ऑडिट रिपोर्ट्स शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी अदालत में विदेशी लेन-देन को साबित करना मुश्किल होगा, खासकर जब भारतीय जांच एजेंसियां जैसे ED और CBI ने कोई कार्रवाई नहीं की।
शेयर बाजार पर प्रभाव और निवेशकों के लिए सलाह
इस कानूनी जंग का सीधा असर अदाणी ग्रुप के शेयरों पर पड़ा है। 23 जनवरी की गिरावट के बाद, 30 जनवरी तक शेयरों में अस्थिरता बनी हुई है। निम्नलिखित प्रमुख कंपनियों के प्रदर्शन का सारांश:
अडानी एंटरप्राइजेज : 23 जनवरी को 3,200 रुपये से गिरकर 2,800 रुपये, अब 2,950 रुपये पर ट्रेडिंग।
अडानी पोर्ट्स : 10% गिरावट, मार्केट कैप में 2 बिलियन डॉलर का नुकसान।
अडानी ग्रीन एनर्जी : सोलर फोकस के कारण सबसे ज्यादा प्रभावित, 12% डाउन लेकिन रिन्यूएबल एनर्जी ट्रेंड से रिकवरी की उम्मीद।
अडानी पावर : 8% गिरावट, लेकिन थर्मल पावर प्रोजेक्ट्स से स्थिरता।
निवेशकों को सलाह है कि लॉन्ग-टर्म होल्ड करें, क्योंकि अदाणी ग्रुप के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स जैसे मुंद्रा पोर्ट और ग्रीन एनर्जी इनिशिएटिव्स मजबूत हैं। यदि अदालत में समझौता होता है, तो शेयरों में 15-20% उछाल संभव है। हालांकि, यदि मामला लंबा खिंचता है, तो आगे गिरावट का जोखिम बना रहेगा।
रणनीतिक कदम और भविष्य की संभावनाएं
अदाणी की टीम अब SEC के साथ नेगोशिएशन पर फोकस कर रही है। गिउफ्रा की पिछली सफलताओं, जैसे ट्रंप के मामले में सीनेट से एक्विटल हासिल करना, से प्रेरित होकर ग्रुप कोर्ट में प्रक्रियात्मक तर्कों का इस्तेमाल करेगा। उदाहरण के लिए, वे तर्क दे सकते हैं कि समन की सेवा भारतीय कानूनों के तहत होनी चाहिए, न कि ईमेल से। इसके अलावा, ग्रुप ने अपनी कॉर्पोरेट गवर्नेंस को मजबूत करने के लिए नए ऑडिटर्स नियुक्त किए हैं, जिससे निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा।
भारतीय बाजार में इस मामले का व्यापक प्रभाव है, क्योंकि अदाणी ग्रुप देश की GDP में 1% से अधिक योगदान देता है। यदि जीत मिलती है, तो यह विदेशी निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत होगा, खासकर GQG पार्टनर्स जैसे फंड्स जो अदाणी में 20% से अधिक स्टेक रखते हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2026 के अंत तक, यदि मामला सुलझ जाता है, तो ग्रुप की वैल्यूएशन 200 बिलियन डॉलर पार कर सकती है।
संभावित परिणामों के परिदृश्य
सर्वश्रेष्ठ परिदृश्य : SEC के साथ सेटलमेंट, जुर्माना भरकर मामला खत्म; शेयरों में तेज उछाल।
मध्यम परिदृश्य : मामला लंबा खिंचता है, लेकिन कोई आपराधिक आरोप नहीं; बाजार में स्थिरता।
सबसे खराब परिदृश्य : अदालत में हार, ग्रुप पर प्रतिबंध; मार्केट कैप में 30% गिरावट।
ये परिदृश्य अदाणी की कानूनी रणनीति पर निर्भर करेंगे, जहां ट्रंप के वकील की भूमिका निर्णायक साबित हो सकती है।
Disclaimer: यह लेख समाचार रिपोर्ट और बाजार विश्लेषण पर आधारित है। निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले पेशेवर सलाह लें। स्रोतों की गोपनीयता बनाए रखी गई है।










