बजट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम आदमी के लिए सस्ते ईवी, सोलर पैनल और मोबाइल पर कस्टम ड्यूटी घटाई, स्टूडेंट्स के लिए ओवरसीज एजुकेशन पर टीसीएस 2% किया और एजुकेशन बजट 1.39 लाख करोड़ बढ़ाया, जबकि बुजुर्गों को मेडिकल खर्च पर 50,000 रुपये की डिडक्शन और फॉर्म 15H की आसान फाइलिंग दी। ये 5 फैसले टैक्स बचत, सस्ती टेक्नोलॉजी और बेहतर हेल्थकेयर से पैसे की बचत करेंगे।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में आम आदमी की जेब पर फोकस करते हुए कई राहतें दीं, जिनमें टैक्स सिस्टम को सरल बनाना शामिल है। नई इनकम टैक्स एक्ट 2025 अप्रैल 2026 से लागू होगी, जो पेनाल्टी और प्रॉसीक्यूशन को रेशनलाइज करेगी। इससे छोटे टैक्सपेयर्स को कम्प्लायंस बोझ कम होगा और टैक्स बचत बढ़ेगी। सेक्शन 87A रिबेट को 60,000 रुपये तक रखा गया है, जिससे 12 लाख रुपये तक की इनकम पर जीरो टैक्स रहेगा। इसके अलावा, स्टैंडर्ड डिडक्शन को बढ़ाने की उम्मीदों पर ध्यान देते हुए, सैलरीड क्लास के लिए ईपीएफ वेज सीलिंग 15,000 रुपये पर ही रखी गई, लेकिन ओवरसीज एजुकेशन और मेडिकल रेमिटेंस पर टीसीएस को 5% से घटाकर 2% कर दिया गया, जो फैमिलीज के लिए सालाना हजारों रुपये की बचत करेगा।
आम आदमी के लिए सस्ती टेक्नोलॉजी पर जोर देते हुए, लिथियम-आयन बैटरी और सोलर पैनल के कैपिटल गुड्स पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को हटा दिया गया, जिससे ईवी की कीमतें 10-15% तक कम हो सकती हैं। मोबाइल फोन और अन्य टेक प्रोडक्ट्स पर भी ड्यूटी रिडक्शन से रोजमर्रा की खरीदारी सस्ती होगी। एमएसएमई सपोर्ट के तहत, मैनपावर सप्लाई सर्विसेज पर टीडीएस को 1% या 2% पर सेट किया गया, जो छोटे बिजनेस ओनर्स को कैश फ्लो मैनेजमेंट में मदद करेगा।
स्टूडेंट्स को स्पेशल गिफ्ट देते हुए, एजुकेशन मिनिस्ट्री का बजट 8.27% बढ़ाकर 1.39 लाख करोड़ रुपये किया गया, जिसमें स्कूल एजुकेशन के लिए 83,562 करोड़ और हायर एजुकेशन के लिए 55,727 करोड़ शामिल हैं। पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप्स का विकास, वेटरनरी और पैरा-वेटरनरी कॉलेजेस की स्थापना, साथ ही AVGC कंटेंट क्रिएटर लैब्स का सेटअप स्टूडेंट्स को स्किल बिल्डिंग में मदद करेगा। ओवरसीज एजुकेशन पर कम टीसीएस से स्टूडेंट्स की विदेशी पढ़ाई का खर्च घटेगा, जो मिडिल क्लास फैमिलीज के लिए बड़ी राहत है। इसके अलावा, गर्ल्स हॉस्टल्स का विस्तार हर राज्य में किया जाएगा, जो महिला स्टूडेंट्स की सेफ्टी और एक्सेसिबिलिटी बढ़ाएगा।
बुजुर्गों के लिए हेल्थकेयर और इनकम सपोर्ट पर फोकस करते हुए, जनरल मेडिकल एक्सपेंडिचर पर 50,000 रुपये की डिडक्शन दी गई, जो सीनियर सिटिजंस को सालाना टैक्स बचत देगी। फॉर्म 15H को अब डिपॉजिटरीज के जरिए एक बार फाइल करने की सुविधा मिली, जिससे मल्टीपल कंपनियों से डिविडेंड या इंटरेस्ट पर टीडीएस अवॉइड करना आसान हो गया। मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल से मिलने वाले इंटरेस्ट को इनकम टैक्स से एग्जेम्प्ट किया गया, जो विक्टिम्स और उनके फैमिलीज के लिए फाइनेंशियल रिलीफ है। इसके अलावा, 24 नए गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेजेस की स्थापना से बुजुर्गों की हेल्थकेयर एक्सेस बेहतर होगी।
इन फैसलों को बेहतर समझने के लिए यहां एक टेबल दी गई है, जो 5 मुख्य फैसलों और उनकी बचत को हाइलाइट करती है:
| फैसला | विवरण | बचत का प्रभाव |
|---|---|---|
| टैक्स सिम्प्लिफिकेशन और रिबेट | नई इनकम टैक्स एक्ट 2025 से पेनाल्टी रिडक्शन, सेक्शन 87A रिबेट 60,000 रुपये तक। | आम आदमी को 12 लाख तक इनकम पर जीरो टैक्स, सालाना 20,000-30,000 रुपये की बचत। |
| सस्ते ईवी और टेक प्रोडक्ट्स | लिथियम-आयन और सोलर पर ड्यूटी रिमूवल। | ईवी पर 10-15% कीमत कम, मोबाइल्स पर 5-8% सस्ते, आम आदमी की मंथली सेविंग्स बढ़ेंगी। |
| ओवरसीज एजुकेशन पर टीसीएस रिडक्शन | 5% से 2% तक घटाव। | स्टूडेंट्स और फैमिलीज को विदेशी पढ़ाई पर 30,000-50,000 रुपये सालाना बचत। |
| बुजुर्गों के लिए मेडिकल डिडक्शन | 50,000 रुपये तक एक्सपेंडिचर पर राहत। | सीनियर सिटिजंस को हेल्थकेयर पर टैक्स सेविंग, औसतन 10,000-15,000 रुपये प्रति वर्ष। |
| एजुकेशन बजट बढ़ोतरी | 1.39 लाख करोड़, यूनिवर्सिटी टाउनशिप्स और स्किल लैब्स। | स्टूडेंट्स को सस्ती एजुकेशन और जॉब स्किल्स, लॉन्ग-टर्म में इनकम ग्रोथ से पैसे की बचत। |
ये फैसले न सिर्फ तत्काल राहत देते हैं, बल्कि लॉन्ग-टर्म में इकोनॉमिक ग्रोथ को बूस्ट करेंगे। एमएसएमई के लिए सेफ हार्बर मार्जिन को 15.5% पर सेट किया गया, जो आईटी सर्विसेज में काम करने वाले आम लोगों को फायदा देगा। नॉन-रेजिडेंट्स के लिए MAT एग्जेम्प्शन और प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन पर राहत से फॉरेन इन्वेस्टमेंट बढ़ेगा, जो जॉब क्रिएशन से आम आदमी की इनकम को सपोर्ट करेगा।
आगे, की पॉइंट्स में इन फैसलों के डिटेल्ड इम्पैक्ट को देखें:
आम आदमी के लिए टैक्स रिलीफ : टीडीएस प्रोसेस को ऑटोमेटेड बनाया गया, जिससे छोटे टैक्सपेयर्स को लोअर या निल डिडक्शन सर्टिफिकेट आसानी से मिलेगा। इससे कैश फ्लो बेहतर होगा और अननेसेसरी टैक्स पेमेंट्स से बचा जा सकेगा।
स्टूडेंट्स की स्किलिंग : AVGC लैब्स और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी से क्रिएटिव और सर्विस सेक्टर में जॉब्स बढ़ेंगी, जो स्टूडेंट्स को बिना एक्स्ट्रा कोर्स फीस के स्किल्स देगी।
बुजुर्गों की फाइनेंशियल सिक्योरिटी : सीनियर सिटिजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) में कोई बदलाव नहीं, लेकिन हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर डिडक्शन को बढ़ाने की दिशा में कदम, जो फैमिलीज को बुजुर्गों की केयर में मदद करेगा।
इकोनॉमिक इम्पैक्ट : कैपिटल एक्सपेंडिचर को 12.2 लाख करोड़ बढ़ाया गया, जो इंफ्रास्ट्रक्चर से जॉब्स क्रिएट करेगा और आम आदमी की इनकम बढ़ाएगा।
सस्टेनेबल ग्रोथ : ईवी और सोलर पर फोकस से एनवायरनमेंटल कॉस्ट्स कम होंगी, जो लॉन्ग-टर्म में हेल्थ और यूटिलिटी बिल्स पर बचत करेगा।
इन सबके अलावा, बजट में फॉरेन कंपनियों को क्लाउड सर्विसेज के लिए टैक्स हॉलिडे तक 2047 तक दिया गया, जो इंडिया-बेस्ड डेटा सेंटर्स से जॉब्स बढ़ाएगा। छोटे बिजनेस के लिए यूनिलेटरल APA प्रोसेस को फास्ट-ट्रैक किया गया, जो दो साल में पूरा होगा, इससे टैक्स अनसर्टेंटी कम होगी। कुल मिलाकर, ये फैसले आम आदमी, स्टूडेंट्स और बुजुर्गों की जेब को मजबूत बनाते हैं, बिना अननेसेसरी खर्च बढ़ाए।
Disclaimer: यह लेख सूचना उद्देश्यों के लिए है और पेशेवर सलाह का विकल्प नहीं है। इसमें दिए गए विचार सामान्य हैं और व्यक्तिगत परिस्थितियों पर लागू नहीं हो सकते।










