“भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच जुलाई 2025 में हस्ताक्षरित Comprehensive Economic and Trade Agreement (CETA) अप्रैल 2026 से प्रभावी हो सकता है। सरकारी अधिकारी ने पुष्टि की है कि ब्रिटिश संसद की मंजूरी के बाद यह लागू होगा, जिससे 99% भारतीय निर्यात शुल्क-मुक्त ब्रिटेन पहुंचेगा, जबकि भारत में कारों, स्कॉच व्हिस्की सहित ब्रिटिश उत्पादों पर टैरिफ कम होगा। इससे द्विपक्षीय व्यापार में तेज वृद्धि, रोजगार सृजन और निवेश बढ़ने की उम्मीद है।”
भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते पर बड़ा अपडेट
भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अप्रैल 2026 से लागू करने की मजबूत संभावना जताई गई है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने पुष्टि की कि पिछले साल जुलाई में साइन हुए Comprehensive Economic and Trade Agreement (CETA) पर अब ब्रिटिश संसद में चर्चा और मंजूरी का प्रक्रिया चल रही है। दोनों पक्षों में रैटिफिकेशन प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है, ताकि नया वित्तीय वर्ष शुरू होते ही समझौता अमल में आ सके।
यह समझौता जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लंदन यात्रा के दौरान साइन हुआ था। इसमें दोनों देशों ने व्यापार बाधाओं को हटाने, टैरिफ कम करने और सेवाओं-निवेश में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। मुख्य बिंदु यह है कि भारतीय निर्यातकों को ब्रिटेन में 99 प्रतिशत उत्पादों पर जीरो ड्यूटी का लाभ मिलेगा। इससे टेक्सटाइल, फुटवियर, जेम्स एंड ज्वेलरी, स्पोर्ट्स गुड्स, टॉयज, फार्मास्यूटिकल्स और आईटी से जुड़े उत्पादों को बड़ा फायदा होगा।
भारत की ओर से ब्रिटिश उत्पादों पर टैरिफ में कटौती की गई है। स्कॉच व्हिस्की, कारें, चॉकलेट, बिस्किट और कॉस्मेटिक्स जैसे सामानों पर आयात शुल्क काफी कम होगा। ब्रिटिश कार निर्माताओं को भारतीय बाजार में आसान पहुंच मिलेगी, जबकि भारतीय निर्यातकों को यूके में प्रतिस्पर्धी मूल्य पर बिक्री का मौका मिलेगा।
समझौते के तहत Double Contributions Convention (DCC) भी साइन हुआ है। इससे दोनों देशों के बीच अस्थायी रूप से काम करने वाले श्रमिकों को सोशल सिक्योरिटी या पेंशन पर दोहरा योगदान नहीं देना पड़ेगा। आईटी प्रोफेशनल्स, इंजीनियर्स और अन्य स्किल्ड वर्कर्स के लिए यह राहत महत्वपूर्ण होगी।
द्विपक्षीय व्यापार वर्तमान में लगभग 60 बिलियन डॉलर के आसपास है। समझौते के लागू होने से 2030 तक इसे दोगुना यानी 120 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। भारतीय निर्यात में वृद्धि से टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर में लाखों रोजगार बढ़ सकते हैं, जबकि ब्रिटेन से निवेश और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर तेज होगा।
समझौते की कुछ प्रमुख शर्तें:
भारतीय निर्यात: 99% उत्पाद जीरो ड्यूटी पर यूके में प्रवेश
ब्रिटिश निर्यात: कारों, व्हिस्की, चॉकलेट आदि पर चरणबद्ध टैरिफ कटौती
सेवाएं: प्रोफेशनल सर्विसेज और आईटी में बेहतर पहुंच
निवेश: दोनों देशों में निवेश संरक्षण और आसान नियम
श्रमिक लाभ: DCC से सोशल सिक्योरिटी में राहत
ब्रिटिश संसद में दोनों सदनों में बहस चल रही है। Commons में फरवरी 2026 में चर्चा हुई, जबकि Lords में मार्च तक प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है। भारत में कैबिनेट की मंजूरी के बाद अंतिम तारीख तय होगी। अधिकारी ने कहा कि अप्रैल 2026 से लागू करने के लिए दोनों पक्ष समन्वय में काम कर रहे हैं।
यह समझौता ब्रेक्सिट के बाद यूके का सबसे बड़ा ट्रेड डील माना जा रहा है, जबकि भारत के लिए यह यूरोप में बाजार विस्तार का महत्वपूर्ण कदम है। भारतीय उद्योग जगत इसे निर्यात बढ़ाने और वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत स्थिति के लिए गेम-चेंजर मान रहा है।










