**_ यदि होर्मुज जलडमरूमध्य 4-8 सप्ताह तक प्रभावी रूप से बंद रहता है, तो वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। इससे दुनिया भर में ईंधन, परिवहन और वस्तुओं की कीमतें तेजी से बढ़ेंगी, जिससे महंगाई का दौर शुरू हो सकता है। भारत जैसे आयात-निर्भर देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 20-30% तक उछाल संभव है, जबकि एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। _**
होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से कच्चे तेल 150 डॉलर तक पहुंचने का खतरा, महंगाई बढ़ने की आशंका
ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) अब वैश्विक ऊर्जा संकट का केंद्र बन चुका है। इस संकरे समुद्री मार्ग से दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद गुजरते हैं। 2025 में यहां से औसतन 20 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल का प्रवाह था, जो वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का करीब 25% और कुल तेल खपत का 20% हिस्सा है।
फरवरी 2026 के अंत में शुरू हुए संघर्ष के बाद मार्च की शुरुआत से ही ईरानी सेनाओं ने इस जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है। IRGC कमांडरों ने स्पष्ट कहा है कि बिना अनुमति के कोई जहाज गुजरने नहीं दिया जाएगा। परिणामस्वरूप, तेल टैंकरों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। AIS डेटा के अनुसार, सामान्य 150+ दैनिक ट्रांजिट की तुलना में अब मात्र 10-15 जहाज ही गुजर पा रहे हैं, और कई टैंकर हमलों या माइन की आशंका से फंसे हुए हैं।
वर्तमान में Brent क्रूड ऑयल की कीमत 100-103 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुकी है, जो संघर्ष शुरू होने से पहले के स्तर से 40-50% अधिक है। विश्लेषकों का अनुमान है कि यदि बंदी 4-8 सप्ताह तक बनी रही तो आपूर्ति में 15-18 मिलियन बैरल प्रतिदिन की कमी आ सकती है। कुछ अनुमानों में यह कमी वैश्विक मांग के 15% के करीब पहुंच सकती है।
संभावित प्रभाव और कीमतों का अनुमान
अल्पकालिक (4 सप्ताह तक) : पाइपलाइन बाइपास (जैसे सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन) और रणनीतिक भंडारों से कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन कीमतें 120-130 डॉलर तक पहुंच सकती हैं।
मध्यम अवधि (4-8 सप्ताह) : वैश्विक मांग-आपूर्ति असंतुलन से कीमतें 150 डॉलर या उससे अधिक पर जा सकती हैं। Wood Mackenzie जैसे विश्लेषकों ने कहा है कि 15 मिलियन बैरल दैनिक कमी से बाजार को संतुलित करने के लिए Brent को कम से कम 150 डॉलर तक पहुंचना होगा।
दीर्घकालिक जोखिम : यदि बंदी लंबी खिंची तो स्टैगफ्लेशन (महंगाई + आर्थिक मंदी) का खतरा बढ़ेगा। एशिया, खासकर चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया पर सबसे ज्यादा असर क्योंकि 80% से अधिक तेल यहां जाता है।
भारत पर पड़ने वाला प्रभाव
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है। यहां की 80-85% तेल जरूरतें आयात से पूरी होती हैं, जिनमें से बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है। होर्मुज बंद होने से:
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तेज उछाल संभव, जो परिवहन और विनिर्माण लागत बढ़ाएगा।
एलपीजी और अन्य ईंधनों की कमी की आशंका, हालांकि सरकार ने 3-4 सप्ताह का स्टॉक बताया है।
रुपये पर दबाव बढ़ेगा, क्योंकि तेल आयात बिल में वृद्धि होगी।
महंगाई दर में 1-2% अतिरिक्त वृद्धि का अनुमान, जो खाद्य और अन्य वस्तुओं को भी प्रभावित करेगी।
वैश्विक प्रतिक्रियाएं और विकल्प
IEA ने रिकॉर्ड 400 मिलियन बैरल रणनीतिक भंडार जारी करने की सिफारिश की है। अमेरिका ने SPR से बड़ा हिस्सा देने की तैयारी दिखाई है। नौसेना एस्कॉर्ट और युद्ध जोखिम बीमा बढ़ाने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि, ईरान की माइन और ड्रोन क्षमता से स्थिति जटिल बनी हुई है।
संभावित परिदृश्य तालिका
| अवधि | संभावित कमी (मिलियन बैरल/दिन) | Brent कीमत अनुमान (डॉलर/बैरल) | मुख्य प्रभाव |
|---|---|---|---|
| 1-2 सप्ताह | 10-12 | 110-120 | तत्काल उछाल, शिपिंग लागत बढ़ना |
| 4 सप्ताह | 15-16 | 130-140 | एशिया में LNG कीमतें दोगुनी |
| 4-8 सप्ताह | 16-18 | 150+ | महंगाई स्पाइक, स्टैगफ्लेशन जोखिम |
| 8+ सप्ताह | 18+ | 160-200 | वैश्विक मंदी का खतरा |
यह संकट वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की कमजोरियों को उजागर कर रहा है। भारत सहित सभी देशों को वैकल्पिक स्रोतों (रूस, अमेरिका, अफ्रीका) और नवीकरणीय ऊर्जा पर जोर बढ़ाना होगा। स्थिति अभी भी तरल है और किसी भी सैन्य हस्तक्षेप से और बदलाव आ सकता है।










