दुनिया में मध्य पूर्व में अमेरिका-ईरान संघर्ष और अन्य भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के बावजूद सोना और चांदी की कीमतें गिर रही हैं। मजबूत अमेरिकी डॉलर, बढ़ती बॉन्ड यील्ड और तेल की कीमतों से जुड़े मुद्रास्फीति के डर ने सुरक्षित निवेश की अपील कम कर दी है। भारत में 24 कैरेट सोना आज करीब ₹15,966 प्रति ग्राम और चांदी ₹275 प्रति ग्राम पर कारोबार कर रही है, जो हाल के रिकॉर्ड हाई से 5-10% तक नीचे है।
सोना-चांदी की कीमतें क्यों गिर रही हैं?
वर्तमान में वैश्विक बाजारों में सोना और चांदी पर दबाव दिख रहा है, भले ही मध्य पूर्व में युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है। अमेरिका-ईरान संघर्ष ने तेल की कीमतों को बढ़ाया है, जिससे मुद्रास्फीति के खतरे बढ़ गए हैं। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कम हुई हैं। मजबूत डॉलर ने कीमती धातुओं को अन्य मुद्राओं में महंगा बना दिया है।
वैश्विक स्तर पर सोना स्पॉट $5,020 प्रति औंस के आसपास है, जो हाल के उच्च स्तर $5,400 से नीचे आ चुका है। इसी तरह चांदी $80-81 प्रति औंस पर है। भारत में MCX पर गोल्ड फ्यूचर्स अप्रैल कॉन्ट्रैक्ट ₹1,58,400 प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड कर रहा है, जो पिछले हफ्तों के ₹1,63,000+ से काफी कम है। चांदी MCX पर ₹2,59,279 प्रति किलो पर है, जो हाल के पीक से 3-5% नीचे है।
भारत में आज की दरें (15 मार्च 2026)
24 कैरेट सोना : ₹15,966 प्रति ग्राम (10 ग्राम के लिए ₹1,59,660)
22 कैरेट सोना : ₹14,635 प्रति ग्राम (10 ग्राम के लिए ₹1,46,350)
18 कैरेट सोना : ₹11,974 प्रति ग्राम
चांदी : ₹275 प्रति ग्राम या ₹2,75,000 प्रति किलो
ये दरें प्रमुख शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, चेन्नई में थोड़ी भिन्न हो सकती हैं, लेकिन औसतन यही स्तर हैं। पिछले कुछ दिनों में सोना ₹1,500-2,000 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹5,000-10,000 प्रति किलो तक गिर चुकी है।
रिकॉर्ड हाई से कितना गिरावट?
हाल के महीनों में सोना ₹1,68,000 प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था, जब भू-राजनीतिक तनाव चरम पर थे। अब यह स्तर ₹1,59,000-1,60,000 के आसपास है, यानी 5-6% की गिरावट। चांदी ₹3 लाख प्रति किलो के करीब थी, अब ₹2.75-2.80 लाख पर, यानी 8-10% सस्ती।
मुख्य कारणों की सूची
मजबूत अमेरिकी डॉलर : डॉलर इंडेक्स में तेजी से सोना-चांदी अन्य मुद्राओं में महंगे हो जाते हैं, जिससे मांग घटती है।
उच्च बॉन्ड यील्ड : अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़ने से गोल्ड की होल्डिंग कॉस्ट बढ़ जाती है, क्योंकि यह कोई ब्याज नहीं देता।
मुद्रास्फीति का डर : युद्ध से तेल $100+ पर पहुंचने से महंगाई बढ़ सकती है, जिससे फेड दरें नहीं घटाएगा, बल्कि बनाए रखेगा या बढ़ाएगा।
प्रॉफिट बुकिंग : पिछले रैली के बाद निवेशक मुनाफा वसूल रहे हैं।
सुरक्षित निवेश में बदलाव : कुछ निवेशक डॉलर और ट्रेजरी में शिफ्ट हो रहे हैं।
बाजार विशेषज्ञों का अनुमान
कुछ एनालिस्ट मानते हैं कि अगर तनाव और बढ़ा तो सोना फिर $5,300+ जा सकता है। लेकिन फिलहाल डॉलर और यील्ड का दबाव हावी है। भारत में त्योहारों और शादी सीजन की मांग से स्थानीय स्तर पर सपोर्ट मिल सकता है, लेकिन वैश्विक ट्रेंड ही मुख्य रहेगा।
निवेशकों के लिए सलाह
अगर आप लंबी अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं तो गिरावट में खरीदारी का मौका हो सकता है, लेकिन शॉर्ट टर्म में सावधानी बरतें। डॉलर मूवमेंट और फेड की नीति पर नजर रखें।
Disclaimer : यह लेख बाजार की वर्तमान स्थिति पर आधारित सूचनात्मक है। निवेश से पहले विशेषज्ञ सलाह लें। कीमतें बदल सकती हैं।










