“बजट 2026 में STT की दरें बढ़ाने से डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग महंगी हुई है, खासकर फ्यूचर्स पर 0.02% से 0.05% और ऑप्शंस पर 0.1% से 0.15% तक। इससे हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स और रिटेल निवेशकों पर असर पड़ेगा, ट्रेडिंग वॉल्यूम घटेगा, जिससे ब्रोकरेज फर्मों और एक्सचेंजों के शेयरों की कमाई लॉन्ग टर्म में 10-20% तक गिर सकती है। प्रभावित शेयरों में BSE, Angel One, MCX जैसे शामिल हैं, जबकि आर्बिट्रेज फंड्स के रिटर्न्स भी 0.3-0.5% कम होंगे। बाजार में लिक्विडिटी कम होने से वोलेटिलिटी बढ़ेगी, लेकिन लॉन्ग-टर्म इक्विटी इनवेस्टर्स पर सीधा असर नहीं।”
बजट 2026 में STT बढ़ोतरी का असर
बजट 2026 में फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) की दरों में बढ़ोतरी का ऐलान किया है, जो अप्रैल 1, 2026 से लागू होगी। यह बदलाव मुख्य रूप से इक्विटी डेरिवेटिव्स पर केंद्रित है, जहां फ्यूचर्स ट्रेडिंग पर STT 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है, जबकि ऑप्शंस प्रीमियम पर 0.1% से 0.15% और ऑप्शंस एक्सरसाइज पर 0.125% से 0.15% तक। इस फैसले का उद्देश्य स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग को कम करना है, खासकर रिटेल निवेशकों के बीच, जहां SEBI की रिपोर्ट्स के मुताबिक 90% से ज्यादा ट्रेडर्स घाटा उठाते हैं।
हालांकि, इक्विटी डिलीवरी ट्रेड्स और म्यूचुअल फंड्स पर STT में कोई बदलाव नहीं हुआ है। लेकिन डेरिवेटिव्स सेगमेंट में यह बढ़ोतरी ट्रेडिंग कॉस्ट को 50-150% तक बढ़ा सकती है, जो हाई-वॉल्यूम ट्रेडर्स के लिए चुनौतीपूर्ण साबित होगी। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे NSE और BSE जैसे एक्सचेंजों की आय में कमी आएगी, क्योंकि F&O वॉल्यूम 20-30% तक घट सकता है।
प्रभावित सेक्टर्स और उनके रिस्क्स
STT बढ़ोतरी का सबसे बड़ा असर ब्रोकरेज और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर पर पड़ेगा। हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग (HFT) और शॉर्ट-टर्म स्ट्रैटेजीज पर निर्भर कंपनियां लॉन्ग टर्म में कमाई में गिरावट देखेंगी। यहां कुछ प्रमुख सेक्टर्स और उनके संभावित इंपैक्ट्स की डिटेल:
ब्रोकरेज फर्म्स : ये कंपनियां F&O ट्रेडिंग से 60-70% रेवेन्यू कमाती हैं। बढ़ी हुई कॉस्ट से क्लाइंट्स ट्रेड्स कम करेंगे, जिससे ब्रोकरेज इनकम घटेगी। उदाहरण के लिए, FY 2025 में Angel One का F&O सेगमेंट 40% ग्रोथ दिखा था, लेकिन अब लॉन्ग टर्म में 15-20% की गिरावट संभावित है।
स्टॉक एक्सचेंज : BSE और MCX जैसे प्लेटफॉर्म्स पर ट्रांजैक्शन फीस से आय होती है। वॉल्यूम घटने से उनके प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव पड़ेगा। NSE के डेरिवेटिव्स वॉल्यूम में 25% की कमी से लॉन्ग टर्म ईयरनिंग्स 10% तक गिर सकती है।
आर्बिट्रेज और हाइब्रिड फंड्स : ये फंड्स फ्यूचर्स पर निर्भर रहते हैं। STT बढ़ने से उनके रिटर्न्स 30-50 bps (0.3-0.5%) कम होंगे, जो निवेशकों को डेट फंड्स की ओर धकेल सकता है।
बैंकिंग और NBFC : HDFC Bank और ICICI Bank जैसे बड़े बैंक ट्रेडिंग डेस्क से आय कमाते हैं। अगर मार्केट लिक्विडिटी कम हुई, तो उनके ट्रेजरी ऑपरेशंस प्रभावित होंगे, हालांकि असर सीमित रहेगा।
लॉन्ग टर्म में नुकसान वाली शेयरों की लिस्ट
नीचे उन शेयरों की लिस्ट है, जिन्हें STT बढ़ोतरी से लॉन्ग टर्म में नुकसान हो सकता है। ये अनुमान मार्केट ट्रेंड्स, FY 2025 के डेटा और एक्सपर्ट एनालिसिस पर आधारित हैं। हर शेयर के लिए संभावित ईयरनिंग्स ड्रॉप और रिस्क फैक्टर्स दिए गए हैं:
| शेयर का नाम | वर्तमान प्राइस (फरवरी 2, 2026 तक) | संभावित लॉन्ग टर्म ईयरनिंग्स गिरावट (%) | कारण |
|---|---|---|---|
| BSE | ₹2,850 | 15-20% | F&O वॉल्यूम में 25% कमी से ट्रांजैक्शन फीस घटेगी। FY 2025 में BSE का 70% रेवेन्यू डेरिवेटिव्स से था। |
| Angel One | ₹1,200 | 20-25% | रिटेल क्लाइंट्स पर फोकस; हाई STT से ट्रेड्स कम होंगे, FY 2026 ईयरनिंग्स में 18% ड्रॉप अनुमानित। |
| MCX | ₹3,500 | 12-18% | कमोडिटी फ्यूचर्स प्रभावित; वॉल्यूम घटने से प्रॉफिट मार्जिन 10% कम। |
| 5Paisa Capital | ₹450 | 18-22% | डिस्काउंट ब्रोकर; लो-मार्जिन ट्रेडर्स दूर होंगे, रेवेन्यू 15% गिर सकता है। |
| IIFL Securities | ₹180 | 10-15% | F&O से 50% आय; बढ़ी कॉस्ट से क्लाइंट चर्न बढ़ेगा। |
| Motilal Oswal Financial Services | ₹650 | 8-12% | एडवाइजरी और ब्रोकरेज मिक्स; लेकिन F&O पर निर्भरता से लॉन्ग टर्म इंपैक्ट। |
| Geojit Financial Services | ₹90 | 15-20% | रीजनल फोकस; रिटेल ट्रेडर्स प्रभावित, ईयरनिंग्स में गिरावट। |
ये शेयर बजट ऐलान के बाद ही 10-15% गिर चुके हैं, और लॉन्ग टर्म में अगर वॉल्यूम नहीं रिकवर हुआ, तो वैल्यूएशन और डिविडेंड्स पर असर पड़ेगा। उदाहरण के लिए, BSE के शेयरों में FY 2025 में 25% ग्रोथ थी, लेकिन अब 10% की नेगेटिव ग्रोथ संभावित है।
मार्केट में वोलेटिलिटी और लिक्विडिटी का प्रभाव
STT बढ़ोतरी से मार्केट में शॉर्ट-टर्म वोलेटिलिटी बढ़ेगी। Sensex और Nifty बजट के दिन 1.35% गिरे थे, और यह ट्रेंड जारी रह सकता है। लॉन्ग टर्म में, कम लिक्विडिटी से प्राइस डिस्कवरी प्रभावित होगी, जिससे बड़े निवेशकों के लिए रिस्क बढ़ेगा। हालांकि, सरकार का इरादा रिटेल स्पेकुलेशन कम करना है, जो SEBI की हालिया स्टडीज से प्रेरित है – जहां 89% इंडिविजुअल ट्रेडर्स ने FY 2025 में घाटा उठाया।
एक्सपर्ट्स जैसे राज गायकड़ (SAMCO Securities) का कहना है कि FII भागीदारी कम हो सकती है, क्योंकि पोस्ट-टैक्स एफिशिएंसी घटेगी। इससे ओवरऑल मार्केट कैप पर दबाव पड़ेगा, लेकिन लॉन्ग-टर्म इक्विटी इनवेस्टर्स के लिए यह अवसर हो सकता है, क्योंकि फंडामेंटल-बेस्ड स्टॉक्स मजबूत रहेंगे।
आर्बिट्रेज फंड्स पर असर
आर्बिट्रेज फंड्स, जो फ्यूचर्स और कैश मार्केट के बीच स्प्रेड से कमाते हैं, सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। FY 2025 में इन फंड्स के एवरेज रिटर्न्स 7-8% थे, लेकिन STT बढ़ने से 0.3-0.5% की कटौती संभावित है। नीचे कुछ प्रमुख फंड्स और उनके अनुमानित इंपैक्ट:
ICICI Prudential Equity Arbitrage Fund: रिटर्न्स में 0.4% गिरावट, AUM ₹20,000 करोड़ प्रभावित।
HDFC Arbitrage Fund: 0.3% ड्रॉप, हाई-वॉल्यूम स्ट्रैटेजीज पर असर।
Kotak Equity Arbitrage Fund: लॉन्ग टर्म रिटर्न्स 6.5% तक गिर सकते हैं।
निवेशकों को अब डेट फंड्स या हाइब्रिड ऑप्शंस पर विचार करना चाहिए, जहां STT का असर नहीं है।
अन्य संभावित प्रभाव
रिटेल ट्रेडर्स : वीकली ऑप्शंस ट्रेडर्स के लिए कॉस्ट 50% बढ़ेगी, जिससे ब्रेकईवन लेवल ऊपर जाएगा। लो-मार्जिन स्ट्रैटेजीज जैसे स्ट्रैडल्स कम प्रॉफिटेबल होंगी।
HFT फर्म्स : अल्गो-बेस्ड ट्रेडिंग पर 150% इंक्रीज से कई फर्म्स ऑपरेशंस स्केल डाउन करेंगी।
शेयर बायबैक : बजट में बायबैक पर कैपिटल गेंस टैक्स लगाया गया है, जो बड़े शेयरहोल्डर्स को प्रभावित करेगा, लेकिन STT से अलग है।
कुल मिलाकर, यह बदलाव मार्केट को ज्यादा स्टेबल बनाने की दिशा में है, लेकिन शॉर्ट-टर्म में ब्रोकरेज और एक्सचेंज शेयरों पर नेगेटिव सेंटिमेंट रहेगा। निवेशकों को लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजीज अपनानी चाहिए, जैसे SIPs या फंडामेंटल स्टॉक्स, जहां STT का असर न्यूनतम है।
Disclaimer: यह लेख सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और निवेश सलाह नहीं माना जाए। बाजार जोखिमों के अधीन है, निवेश से पहले विशेषज्ञ से परामर्श लें।










