“कई निवेशक शिकायत करते हैं कि कंपनी ने उनके डिविडेंड से सीधे टैक्स काट लिया, जबकि वे सोचते थे डिविडेंड पूरी तरह टैक्स-फ्री है। वास्तव में, 2020 से डिविडेंड पर TDS कटौती लागू है और बजट 2025 ने इसमें राहत दी है—अब एक कंपनी से ₹10,000 तक के डिविडेंड पर कोई TDS नहीं कटता।”
शेयरहोल्डर्स के डिविडेंड से TDS कटौती: क्या है पूरा सच?
भारत में शेयर बाजार से डिविडेंड कमाने वाले लाखों निवेशकों के लिए एक आम सवाल है—क्या कंपनी द्वारा घोषित डिविडेंड की पूरी राशि हाथ में आती है या उसमें से कुछ पैसा पहले ही कट जाता है? हां, ज्यादातर मामलों में कंपनी डिविडेंड राशि से TDS (टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स) काटकर बाकी राशि निवेशक के खाते में ट्रांसफर करती है। यह कटौती इनकम टैक्स एक्ट की धारा 194 के तहत अनिवार्य है।
2020 में फाइनेंस एक्ट के जरिए डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (DDT) पूरी तरह खत्म कर दिया गया था। पहले कंपनी डिविडेंड देने से पहले ही टैक्स चुकाती थी, लेकिन अब डिविडेंड शेयरहोल्डर के हाथ में टैक्सेबल इनकम बन गया है और इसे ‘अदर सोर्सेज से इनकम’ के तहत स्लैब रेट पर टैक्स लगता है। इसी वजह से TDS की व्यवस्था शुरू हुई ताकि सरकार को टैक्स का हिस्सा समय पर मिल सके।
वर्तमान TDS नियम (FY 2025-26 के लिए)
बजट 2025 में छोटे निवेशकों को बड़ी राहत मिली है। अब TDS कटौती के नियम इस प्रकार हैं:
एक कंपनी या म्यूचुअल फंड से पूरे वित्तीय वर्ष में कुल डिविडेंड ₹10,000 तक होने पर कोई TDS नहीं कटता।
₹10,000 से ज्यादा डिविडेंड होने पर 10% TDS कटौती अनिवार्य है (रेजिडेंट इंडिविजुअल के लिए)।
यह थ्रेशोल्ड पहले ₹5,000 था, जो 1 अप्रैल 2025 से बढ़ाकर ₹10,000 कर दिया गया।
अगर निवेशक ने वैध PAN नहीं दिया है तो TDS की दर 20% हो जाती है।
नॉन-रेजिडेंट निवेशकों (विदेशी) के लिए TDS 20% है (DTAA के तहत कम दर का लाभ संभव)।
नॉन-इंडिविजुअल रेजिडेंट (जैसे HUF, फर्म, कंपनी) के लिए कोई थ्रेशोल्ड नहीं—पूरे डिविडेंड पर 10% TDS (PAN उपलब्ध होने पर)।
TDS से बचने या कम करने के तरीके
कई निवेशक TDS से पूरी तरह बच सकते हैं या इसे कम कर सकते हैं:
अगर आपकी कुल आय टैक्सेबल लिमिट से नीचे है और आप फॉर्म 15G (60 साल से कम उम्र) या 15H (60 साल से ज्यादा) जमा करते हैं तो कंपनी TDS नहीं काटेगी।
फॉर्म 15G/15H ऑनलाइन या RTA/डिपॉजिटरी के पोर्टल पर जमा किया जा सकता है।
अगर TDS कट गया है तो ITR फाइल करते समय इसे क्लेम कर सकते हैं और एक्सेस टैक्स रिफंड पा सकते हैं।
डिविडेंड इनकम को अन्य इनकम के साथ जोड़कर स्लैब रेट पर टैक्स कैलकुलेट होता है—अगर आप 30% स्लैब में हैं तो कुल टैक्स ज्यादा होगा, लेकिन TDS क्रेडिट मिलेगा।
डिविडेंड टैक्सेशन के प्रमुख बिंदु
ध्यान देने योग्य बातें
| पैरामीटर | नियम (FY 2025-26) | टिप्पणी |
|---|---|---|
| TDS थ्रेशोल्ड | ₹10,000 (एक कंपनी/म्यूचुअल फंड से) | 1 अप्रैल 2025 से लागू |
| TDS दर (रेजिडेंट इंडिविजुअल) | 10% (थ्रेशोल्ड से ऊपर) | PAN न होने पर 20% |
| TDS दर (नॉन-रेजिडेंट) | 20% | DTAA लाभ संभव |
| टैक्सेशन हेड | इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज | स्लैब रेट लागू |
| इंटरेस्ट डिडक्शन | 20% तक (FY 2025-26 तक उपलब्ध) | बजट 2026 से खत्म |
| फॉर्म 15G/15H | TDS से छूट संभव | टैक्सेबल इनकम न होने पर |
TDS सिर्फ कंपनी द्वारा कटौती है—यह अंतिम टैक्स नहीं। असली टैक्स आपकी कुल इनकम पर निर्भर करता है।
अगर कई कंपनियों से डिविडेंड मिल रहा है तो हर कंपनी अलग-अलग थ्रेशोल्ड देखती है—कुल डिविडेंड ₹50,000 होने पर भी अगर एक कंपनी से ₹9,000 है तो उस पर TDS नहीं कटेगा।
ITR में डिविडेंड इनकम को शेड्यूल OS में दिखाना जरूरी है और TDS क्रेडिट क्लेम करें।
बजट 2026 में एक बड़ा बदलाव आया है—डिविडेंड पर ब्याज खर्च का 20% डिडक्शन अब FY 2026-27 से खत्म हो जाएगा, जिससे लोन लेकर शेयर खरीदने वालों का टैक्स बोझ बढ़ेगा।
यह नियम निवेशकों के लिए पारदर्शिता लाते हैं और छोटे निवेशकों को अतिरिक्त राहत देते हैं। डिविडेंड से कमाई जारी रखें, लेकिन TDS और टैक्स नियमों को समझकर अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग मजबूत बनाएं।
Disclaimer: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है और कानूनी/टैक्स सलाह नहीं माना जाना चाहिए। व्यक्तिगत मामलों में चार्टर्ड अकाउंटेंट या टैक्स विशेषज्ञ से परामर्श लें।










