“सोने की कीमतें हाल के हफ्तों में तेज गिरावट के बाद स्थिर होने की कोशिश कर रही हैं। 18 फरवरी 2026 को 24 कैरेट सोना प्रति 10 ग्राम ₹1,54,200 के आसपास है, जो जनवरी के पीक से काफी नीचे है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि वैश्विक कारकों से कीमतें और गिर सकती हैं, लेकिन 1 लाख के नीचे जाने की संभावना 2027 तक ज्यादा मजबूत दिख रही है। निवेशकों को डिप्स पर खरीदारी पर विचार करना चाहिए।”
सोने की कीमत: क्या 1 लाख के नीचे जाएगा सोना, कितना सस्ता हो सकता है; आपको कब लेना चाहिए?
18 फरवरी 2026 को भारत में सोने की कीमतों में दो दिनों की गिरावट के बाद हल्की स्थिरता दिख रही है। MCX पर अप्रैल डिलीवरी सोना ₹1,52,000 से ₹1,54,000 के बीच ट्रेड कर रहा है, जबकि स्पॉट मार्केट में 24 कैरेट सोना प्रति 10 ग्राम ₹1,54,200 पर है। दिल्ली में 24K सोना ₹15,435 प्रति ग्राम, 22K ₹14,150 और 18K ₹11,580 पर पहुंच गया है। मुंबई, चेन्नई और अन्य शहरों में भी समान ट्रेंड दिख रहा है, जहां कीमतें ₹15,400-₹15,500 प्रति ग्राम के बीच हैं।
पिछले दो हफ्तों में सोना 15-20% तक गिर चुका है। जनवरी 2026 में पीक पर ₹1,80,000 प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंचने के बाद अब यह ₹1,54,000 के आसपास है। यह गिरावट मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार से प्रभावित है, जहां COMEX पर सोना $4,800-$4,900 प्रति औंस के बीच कंसॉलिडेट हो रहा है। मजबूत अमेरिकी डॉलर, जियोपॉलिटिकल टेंशन में कमी और फेड की ब्याज दरों पर बदलती उम्मीदें इस गिरावट के प्रमुख कारण हैं।
एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि अल्पावधि में सोना ₹1,47,000-₹1,53,000 के रेंज में रह सकता है। अगर वैश्विक रिस्क कम होते रहे, जैसे यूक्रेन या मिडिल ईस्ट में शांति की संभावना बढ़ी, तो कीमतें और नीचे जा सकती हैं। कुछ एनालिस्ट्स, जैसे PACE 360 के विशेषज्ञ, मानते हैं कि रूस-अमेरिका के बीच संभावित डील से सोना 2027 तक ₹1 लाख प्रति 10 ग्राम से नीचे जा सकता है, यहां तक कि ₹90,000 तक। हालांकि, यह सबसे बेयरिश परिदृश्य है और अभी दूर की बात लग रही है।
प्रमुख प्रभावित करने वाले कारक
अंतरराष्ट्रीय बाजार : COMEX गोल्ड में गिरावट जारी है। डॉलर इंडेक्स मजबूत होने से सोना महंगा लगता है।
भारतीय रुपये की स्थिति : डॉलर के मुकाबले रुपया ₹90 के आसपास है, जो आयातित सोने को महंगा बनाता है लेकिन गिरावट को सीमित भी करता है।
सेंट्रल बैंक डिमांड : वैश्विक सेंट्रल बैंक अभी भी सोना खरीद रहे हैं, जो लॉन्ग टर्म बुलिश ट्रेंड को सपोर्ट करता है।
इक्विटी मार्केट : शेयर बाजार में रिकवरी से निवेशक सोने से पैसा निकाल रहे हैं।
इंडिया-स्पेसिफिक : त्योहारी सीजन खत्म होने और वेडिंग सीजन में डिमांड कम होने से लोकल प्रेशर है।
कीमतें कितनी गिर सकती हैं?
कब खरीदें? निवेश टिप्स
| परिदृश्य | संभावित कीमत (प्रति 10 ग्राम, 24K) | समयसीमा | प्रमुख कारण |
|---|---|---|---|
| अल्पावधि (1-3 महीने) | ₹1,47,000 – ₹1,53,000 | मार्च-मई 2026 | प्रॉफिट बुकिंग और डॉलर मजबूती |
| मध्यम अवधि (6-12 महीने) | ₹1,30,000 – ₹1,45,000 | 2026 अंत | जियोपॉलिटिकल शांति, फेड पॉलिसी |
| लॉन्ग टर्म बेयरिश | ₹90,000 – ₹1,00,000 | 2027 तक | रूस-यूएस डील, ग्लोबल रिस्क कम होना |
| बुलिश रिकवरी | ₹1,60,000+ | अगर टेंशन बढ़े | सेंट्रल बैंक बाइंग, इन्फ्लेशन राइज |
अगर आप शॉर्ट टर्म में ज्वेलरी या इन्वेस्टमेंट के लिए सोना खरीदना चाहते हैं, तो अभी इंतजार करें। कीमतें अभी भी गिरावट के बाद कंसॉलिडेशन फेज में हैं। एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि ₹1,48,000-₹1,52,000 के रेंज में डिप्स पर खरीदारी शुरू करें।
SIP जैसा अप्रोच : हर महीने थोड़ा-थोड़ा सोना खरीदें (डिजिटल गोल्ड या SGB के जरिए) ताकि एवरेज कॉस्ट कम रहे।
Sovereign Gold Bonds : अगर लॉन्ग टर्म (8 साल) के लिए है, तो SGB बेहतर क्योंकि 2.5% ब्याज मिलता है और टैक्स फायदे हैं।
ज्वेलरी खरीद : त्योहार या शादी से पहले ₹1,50,000 से नीचे आने पर खरीदें, लेकिन मेकिंग चार्जेस चेक करें।
रिस्क : अगर जियोपॉलिटिकल इश्यू बढ़े या फेड रेट कट करे, तो कीमतें फिर ऊपर जा सकती हैं।
कुल मिलाकर, सोना अभी भी लॉन्ग टर्म में सेफ एसेट है लेकिन शॉर्ट टर्म में वोलेटाइल रहेगा। स्मार्ट निवेशक डिप्स का फायदा उठाएं और डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो बनाए रखें।
Disclaimer: यह न्यूज और मार्केट ट्रेंड्स पर आधारित रिपोर्ट है। निवेश से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें।










