“भारत के विदेशी मुद्रा भंडार ने जनवरी के अंत तक 14.36 अरब डॉलर की बढ़ोतरी के साथ 723.77 अरब डॉलर का नया रिकॉर्ड बनाया है। इस वृद्धि का मुख्य कारण सोने के भंडार में तेजी है, जबकि विदेशी मुद्रा संपत्तियां थोड़ी घटी हैं। यह मजबूत भंडार अर्थव्यवस्था की स्थिरता को दर्शाता है और सोमवार को शेयर बाजार में सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है, जहां निवेशक आत्मविश्वास बढ़ा हुआ देख सकते हैं।”
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार ने हाल ही में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है, जहां यह 723.77 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इस बढ़ोतरी में 14.36 अरब डॉलर का योगदान रहा, जो मुख्य रूप से सोने के भंडार में उछाल से आया है। tradingeconomics.com रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी मुद्रा संपत्तियां (FCA), जो भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा हैं, 493 मिलियन डॉलर घटकर 562.39 अरब डॉलर पर आ गईं। इसके विपरीत, सोने के भंडार में 14.595 अरब डॉलर की वृद्धि हुई, जो अब 137.683 अरब डॉलर हो गए हैं। xinhuanet.com स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) 216 मिलियन डॉलर बढ़कर 18.953 अरब डॉलर पहुंचे, जबकि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में भारत की रिजर्व पोजीशन 44 मिलियन डॉलर की वृद्धि के साथ 4.746 अरब डॉलर हो गई।
यह वृद्धि अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत संकेत है, क्योंकि मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार देश को बाहरी झटकों से बचाने में मदद करते हैं। वर्तमान में, यह भंडार 11 महीनों से अधिक के माल आयात को कवर करने में सक्षम है, जो RBI गवर्नर द्वारा व्यक्त की गई विश्वास की पुष्टि करता है। m.economictimes.com सोने के मूल्य में वैश्विक स्तर पर उछाल ने भारत के भंडार को मजबूत किया है, क्योंकि भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना आयातकों में से एक है। इस वृद्धि से रुपए की स्थिरता में सुधार हो सकता है, क्योंकि RBI जरूरत पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है।
शेयर बाजार पर इसका असर सोमवार को स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है। मजबूत भंडार निवेशकों में आत्मविश्वास बढ़ाते हैं, जिससे Sensex और Nifty में शुरुआती कारोबार में तेजी आ सकती है। businessworld.in विशेषज्ञों का मानना है कि यह वृद्धि FII (Foreign Institutional Investors) को आकर्षित कर सकती है, क्योंकि मजबूत भंडार अर्थव्यवस्था की लचीलापन दर्शाते हैं। यदि रुपया मजबूत होता है, तो आयात-निर्भर कंपनियां जैसे ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर गुड्स सेक्टर में लाभ हो सकता है। हालांकि, यदि वैश्विक बाजारों में कोई नकारात्मक खबर आती है, तो यह प्रभाव सीमित रह सकता है।
विदेशी मुद्रा भंडार के प्रमुख घटक
नीचे दी गई तालिका में भंडार के प्रमुख घटकों का विवरण है:
| घटक | वर्तमान मूल्य (अरब डॉलर) | पिछली सप्ताह से बदलाव (मिलियन डॉलर) |
|---|---|---|
| विदेशी मुद्रा संपत्तियां (FCA) | 562.392 | -493 |
| सोने के भंडार | 137.683 | +14,595 |
| स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) | 18.953 | +216 |
| IMF में रिजर्व पोजीशन | 4.746 | +44 |
| कुल भंडार | 723.774 | +14,361 |
यह तालिका दर्शाती है कि सोने के भंडार में हुई वृद्धि ने कुल भंडार को ऊपर उठाया है, जबकि FCA में मामूली गिरावट आई है। FCA में बदलाव गैर-अमेरिकी मुद्राओं जैसे यूरो, पाउंड और येन के मूल्यांकन से प्रभावित होता है।
ऐतिहासिक संदर्भ में वृद्धि
पिछले कुछ वर्षों में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार वृद्धि देखी गई है। सितंबर 2024 में यह 704.89 अरब डॉलर का पिछला रिकॉर्ड था, जिसे जनवरी 2026 में तोड़ दिया गया। businessworld.in 1998 से अब तक का औसत भंडार 313.17 अरब डॉलर रहा है, जबकि न्यूनतम 29.048 अरब डॉलर सितंबर 1998 में दर्ज किया गया। tradingeconomics.com इस वृद्धि का श्रेय RBI की सतर्क नीतियों को जाता है, जो विदेशी पूंजी प्रवाह को प्रबंधित करती हैं।
अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
मजबूत भंडार से भारत की क्रेडिट रेटिंग में सुधार हो सकता है, जो विदेशी निवेश को बढ़ावा देगा। यह चालू खाता घाटे को संतुलित करने में मदद करता है और मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखता है। यदि रुपया मजबूत होता है, तो पेट्रोलियम आयात की लागत कम हो सकती है, जो उपभोक्ताओं के लिए राहत होगी। हालांकि, यदि सोने के दाम में उतार-चढ़ाव होता है, तो भंडार में अस्थिरता आ सकती है।
शेयर बाजार पर संभावित प्रभाव
सोमवार को बाजार खुलने पर, इस खबर से बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में तेजी आ सकती है। HDFC Bank, ICICI Bank और SBI जैसे शेयरों में उछाल देखा जा सकता है, क्योंकि मजबूत भंडार बैंकिंग सिस्टम की स्थिरता को मजबूत करते हैं। IT सेक्टर, जो निर्यात-निर्भर है, रुपए की मजबूती से प्रभावित हो सकता है, लेकिन समग्र सेंटीमेंट सकारात्मक रहेगा। यदि एशियाई बाजारों में तेजी रहती है, तो Nifty 50,000 के स्तर को पार कर सकता है।
प्रमुख बिंदु: निवेशकों के लिए सलाह
रुपए की मजबूती का फायदा उठाएं : यदि USD/INR 82 के नीचे जाता है, तो निर्यातक कंपनियों से दूरी बनाएं और आयातकों पर दांव लगाएं।
सोने में निवेश : वैश्विक सोने के दामों में उछाल से Gold ETFs में रुचि बढ़ सकती है।
FII प्रवाह : मजबूत भंडार FII को आकर्षित करेंगे, जिससे ब्लू-चिप शेयरों में वृद्धि होगी।
जोखिम प्रबंधन : वैश्विक अनिश्चितताओं जैसे US Fed नीतियों पर नजर रखें, जो भंडार को प्रभावित कर सकती हैं।
लंबी अवधि का दृष्टिकोण : यह वृद्धि भारत को उभरते बाजारों में मजबूत स्थिति प्रदान करती है, जो निवेश पोर्टफोलियो को विविधीकृत करने का अवसर है।
यह वृद्धि भारत की आर्थिक नीतियों की सफलता को रेखांकित करती है, जहां RBI ने विदेशी पूंजी को संतुलित तरीके से प्रबंधित किया है। भविष्य में, यदि वैश्विक अर्थव्यवस्था स्थिर रहती है, तो भंडार और बढ़ सकते हैं। शेयर बाजार में सोमवार को शुरुआती घंटों में ट्रेडर्स को सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि वॉल्यूम बढ़ने से volatility आ सकती है।
Disclaimer: यह समाचार रिपोर्टों, टिप्स और स्रोतों पर आधारित है।










