मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधा के कारण भारत में रसोई गैस की संभावित कमी से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम (ESMA) के तहत आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल किया। सभी तेल रिफाइनरियों को प्रोपेन और ब्यूटेन का अधिकतम उपयोग LPG उत्पादन में करने, पेट्रोकेमिकल्स के लिए इनका डायवर्शन रोकने और उत्पादित LPG को केवल IOC, HPCL, BPCL को सप्लाई करने का आदेश दिया गया है। इससे घरेलू उपभोक्ताओं को निर्बाध रसोई गैस उपलब्ध कराने का लक्ष्य है, जबकि देश में करीब 33 करोड़ सक्रिय LPG उपभोक्ता हैं और आयात पर 75-80% निर्भरता बनी हुई है।
ऊर्जा संकट के बीच मोदी सरकार का त्वरित कदम
पश्चिम एशिया में ईरान-इजराइल संघर्ष के विस्तार और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से भारत की LPG आयात आपूर्ति पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG आयातक है और इसकी लगभग 85-90% आयात मध्य पूर्व से आती है। पिछले वित्त वर्ष में कुल LPG खपत करीब 33.15 मिलियन मीट्रिक टन रही, जिसमें से केवल 12.8 मिलियन टन का घरेलू उत्पादन हुआ था। बाकी 75-80% आयात पर निर्भर था।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 5 मार्च 2026 को जारी आदेश में आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 के तहत आपात शक्तियों का प्रयोग करते हुए सभी सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की रिफाइनरियों को निर्देश दिया है कि वे प्रोपेन और ब्यूटेन स्ट्रीम्स (जो LPG के मुख्य घटक हैं) का अधिकतम उपयोग LPG उत्पादन में सुनिश्चित करें। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि इन स्ट्रीम्स को पेट्रोकेमिकल उत्पादों या अन्य डाउनस्ट्रीम डेरिवेटिव्स के निर्माण के लिए डायवर्ट, उपयोग, प्रोसेस, क्रैक या कन्वर्ट नहीं किया जाएगा।
यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत के पास तेल रिफाइनिंग क्षमता सरप्लस है, लेकिन LPG उत्पादन में कमी बनी हुई है। रिफाइनरियां अब प्रोपेन और ब्यूटेन को पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक के बजाय घरेलू रसोई गैस बनाने में प्राथमिकता देंगी। इससे घरेलू उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है, जो आयात निर्भरता को कुछ हद तक कम कर सकती है।
केवल सरकारी कंपनियों को सप्लाई, घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता
आदेश के अनुसार, उत्पादित LPG, प्रोपेन और ब्यूटेन केवल तीन सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों—Indian Oil Corporation (IOC), Hindustan Petroleum Corporation Limited (HPCL) और Bharat Petroleum Corporation Limited (BPCL)—को उपलब्ध कराया जाएगा। इन कंपनियों को निर्देश है कि वे इस LPG को केवल घरेलू कुकिंग के लिए उपभोक्ताओं को ही बेचें। किसी भी उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई होगी।
देश में वर्तमान में लगभग 33.2 करोड़ सक्रिय LPG उपभोक्ता हैं। उज्ज्वला योजना और अन्य पहलों से ग्रामीण क्षेत्रों में भी पहुंच बढ़ी है। संकट की स्थिति में घरेलू उपभोक्ताओं की आपूर्ति सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। हाल के महीनों में कुछ इलाकों में स्टॉक स्तर घटकर 25 दिनों के आसपास पहुंच गया था, जिससे यह कदम और जरूरी हो गया।
आयात विकल्पों पर भी फोकस
सरकार ने आयात विविधीकरण पर भी काम किया है। नवंबर 2025 में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने अमेरिका से 2.2 मिलियन टन प्रति वर्ष LPG आयात का एक साल का अनुबंध किया था, जो कुल आयात का करीब 10% है। जनवरी 2026 से इन सप्लाई शुरू हो चुकी हैं। हालांकि, मध्य पूर्व पर निर्भरता अभी भी प्रमुख बनी हुई है।
प्रभाव और अपेक्षित परिणाम
घरेलू उत्पादन वृद्धि : प्रोपेन-ब्यूटेन का पूरा उपयोग LPG में होने से रिफाइनरियों की क्षमता का बेहतर दोहन होगा।
पेट्रोकेमिकल सेक्टर पर असर : अल्किलेट्स जैसे गैसोलीन ब्लेंडिंग कंपोनेंट्स का उत्पादन प्रभावित हो सकता है, खासकर Reliance Industries जैसी कंपनियों में।
उपभोक्ता राहत : रसोई गैस की किल्लत से बचाव, विशेषकर ग्रामीण और निम्न-मध्यम वर्ग के लिए।
ऊर्जा सुरक्षा मजबूत : भू-राजनीतिक जोखिमों से सुरक्षा के लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाना रणनीतिक कदम।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू है और आगे के आदेश तक प्रभावी रहेगा। सरकार का मानना है कि क्रूड ऑयल और LPG स्टॉक फिलहाल आरामदायक स्थिति में हैं, लेकिन सतर्कता बरतना जरूरी है।










