सेबी ने 26 फरवरी 2026 को म्यूचुअल फंड स्कीम्स की कैटेगरी और रेशनलाइजेशन में बड़े बदलाव किए हैं। सॉल्यूशन-ओरिएंटेड स्कीम्स (जिसमें चिल्ड्रन और रिटायरमेंट फंड शामिल हैं) को तत्काल बंद कर दिया गया है, नई लाइफ साइकिल फंड्स शुरू होंगी, इक्विटी फंड्स में गोल्ड-सिल्वर एक्सपोजर बढ़ेगा, पोर्टफोलियो ओवरलैप पर सख्ती आएगी और कैटेगरी कुल 40 हो गई हैं। निवेशकों के मौजूदा यूनिट्स सुरक्षित रहेंगे, लेकिन नई खरीदारी रुक जाएगी और स्कीम्स मर्ज होंगी।
सेबी के 5 बड़े ऐलान: म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए क्या बदलेगा?
सेबी ने आज म्यूचुअल फंड स्कीम्स की कैटेगरी और रेशनलाइजेशन के नियमों में व्यापक बदलाव किए हैं। यह सर्कुलर पुराने नियमों (अक्टूबर और नवंबर 2025) को रिप्लेस करता है और निवेशकों को ज्यादा पारदर्शिता, ‘ट्रू-टू-लेबल’ सुनिश्चित करने और पोर्टफोलियो में ओवरलैप रोकने पर फोकस करता है।
सॉल्यूशन-ओरिएंटेड स्कीम कैटेगरी बंद सबसे बड़ा बदलाव सॉल्यूशन-ओरिएंटेड स्कीम्स की कैटेगरी को तत्काल प्रभाव से डिस्कंटिन्यू करना है। इसमें चिल्ड्रन फंड्स और रिटायरमेंट फंड्स शामिल थे। मौजूदा स्कीम्स अब नई सब्सक्रिप्शन स्वीकार नहीं कर सकेंगी। ये स्कीम्स समान एसेट एलोकेशन और रिस्क प्रोफाइल वाली अन्य स्कीम्स में मर्ज होंगी, जिसके लिए सेबी की पूर्व अनुमति जरूरी होगी। जनवरी 2026 तक इस कैटेगरी में करीब 15 चिल्ड्रन फंड्स और 29 रिटायरमेंट फंड्स थे। निवेशकों के मौजूदा निवेश सुरक्षित रहेंगे, लेकिन नए निवेश नहीं हो पाएंगे।
लाइफ साइकिल फंड्स की नई कैटेगरी शुरू सेबी ने गोल-बेस्ड इन्वेस्टिंग के लिए नई ओपन-एंडेड कैटेगरी ‘लाइफ साइकिल फंड्स’ पेश की है। ये फंड्स प्रीडिटर्माइंड मैच्योरिटी (5 से 30 साल) और ग्लाइड पाथ फॉलो करेंगी, जिसमें उम्र या टारगेट डेट के आधार पर इक्विटी से डेट में शिफ्ट होता रहेगा। स्कीम नाम में मैच्योरिटी डेट शामिल होगी, जैसे Life Cycle Fund 2045 या 2055। यह रिटायरमेंट या लॉन्ग-टर्म गोल्स के लिए ऑटोमेटेड एसेट एलोकेशन देगी, जो पहले सॉल्यूशन-ओरिएंटेड स्कीम्स में था।
इक्विटी और हाइब्रिड स्कीम्स में गोल्ड-सिल्वर एक्सपोजर बढ़ा एक्टिव इक्विटी और हाइब्रिड स्कीम्स अब गोल्ड और सिल्वर इंस्ट्रूमेंट्स (ETF, ETCDs आदि) में ज्यादा निवेश कर सकेंगी। पहले लिमिटेड एक्सपोजर था, अब रिमेनिंग पोर्टफोलियो में 35% तक गोल्ड-सिल्वर और InvITs में जा सकता है। इससे इक्विटी फंड्स में डाइवर्सिफिकेशन बढ़ेगा, खासकर ग्लोबल अनिश्चितता में। साथ ही, गोल्ड-सिल्वर की वैल्यूएशन अब LBMA की बजाय भारतीय स्टॉक एक्सचेंज के पोल्ड स्पॉट प्राइस से होगी (अप्रैल 2026 से लागू)।
पोर्टफोलियो ओवरलैप और ‘ट्रू-टू-लेबल’ पर सख्त नियम सेबी ने पोर्टफोलियो ओवरलैप को 50% से ज्यादा नहीं होने देने का नियम लगाया है, खासकर सेक्टोरल और थीमेटिक फंड्स में। थीमेटिक फंड्स को 3 साल का समय मिला है कंप्लायंस के लिए, बाकी स्कीम्स को 6 महीने। हर महीने कैटेगरी-वाइज ओवरलैप डिस्क्लोजर वेबसाइट पर अनिवार्य होगा। स्कीम नाम और एसेट एलोकेशन में सख्ती से मैचिंग होगी ताकि निवेशक को सही रिस्क-रिटर्न मिले।
कैटेगरी बढ़कर 40 हुईं, इक्विटी में 13 टाइप कुल कैटेगरी 36 से बढ़कर 40 हो गई हैं। ब्रॉड ग्रुप्स: इक्विटी (13), डेट (17), हाइब्रिड (7), लाइफ साइकिल और अन्य (फंड ऑफ फंड्स, इंडेक्स, ETF)। इक्विटी में कॉन्ट्रा और वैल्यू फंड्स दोनों लॉन्च हो सकेंगे (पहले एक ही), फोकस्ड, थीमेटिक आदि में मिनिमम इक्विटी एलोकेशन बढ़ाया गया है। नई सेक्टोरल डेट फंड्स (फाइनेंशियल, एनर्जी, इंफ्रा आदि) भी शुरू होंगी।
निवेशकों के लिए क्या मतलब?
अगर आपके पास चिल्ड्रन या रिटायरमेंट फंड है, तो घबराने की जरूरत नहीं—यूनिट्स वैल्यू पर असर नहीं पड़ेगा, लेकिन नए SIP या लंपसम नहीं कर पाएंगे। AMC जल्द मर्जर प्लान करेगी।
लाइफ साइकिल फंड्स से रिटायरमेंट प्लानिंग आसान होगी, क्योंकि ग्लाइड पाथ ऑटोमेटिक रिस्क कम करता जाएगा।
गोल्ड-सिल्वर एक्सपोजर से इक्विटी फंड्स ज्यादा बैलेंस्ड हो सकते हैं।
ओवरलैप रूल्स से फंड्स ज्यादा यूनिक होंगे, डुप्लिकेट एक्सपोजर कम होगा।
ये बदलाव म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री को ज्यादा ट्रांसपेरेंट और निवेशक-अनुकूल बनाने की दिशा में हैं। निवेश से पहले अपनी स्कीम डॉक्यूमेंट चेक करें और फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें।










