“गोल्ड-निफ्टी रेश्यो हाल ही में 6 से ऊपर पहुंचकर 5 साल के ट्रेंड को तोड़ चुका है, जो ऐतिहासिक रूप से इक्विटी में मजबूत रिकवरी का संकेत देता है। वर्तमान में रेश्यो निचले स्तर पर है, जहां पिछले चक्रों में निफ्टी ने 40-70% तक उछाल दिखाया है। निवेशकों के लिए यह स्टॉक मार्केट में एंट्री का आकर्षक मौका हो सकता है, लेकिन सही टाइमिंग और एसेट एलोकेशन जरूरी है।”
भारतीय शेयर बाजार और गोल्ड के बीच का रेश्यो हाल के महीनों में काफी चर्चा में है। गोल्ड-निफ्टी रेश्यो (या निफ्टी-गोल्ड रेश्यो का उल्टा) 6 से ऊपर चला गया था, जो पिछले 5 सालों के ट्रेंड को पूरी तरह बदल देता है। यह रेश्यो निफ्टी 50 इंडेक्स के स्तर को प्रति 10 ग्राम 24 कैरेट गोल्ड की कीमत से विभाजित करके निकाला जाता है। जब यह रेश्यो ऊंचा होता है, तो इक्विटी महंगी लगती है, लेकिन जब नीचे आता है, तो स्टॉक्स सस्ते और आकर्षक दिखते हैं।
वर्तमान स्थिति में निफ्टी-गोल्ड रेश्यो 1.7 के आसपास पहुंच चुका है, जो 2.5 से काफी नीचे है। यह स्तर ऐतिहासिक रूप से बुलिश सिग्नल माना जाता है। पिछले 15-20 सालों में जब भी यह रेश्यो 2.5 से नीचे गिरा, निफ्टी ने मजबूत तेजी दिखाई। उदाहरण के लिए:
अक्टूबर 2020 में रेश्यो 2.5 से नीचे आने के बाद निफ्टी में 65% से ज्यादा की रैली आई।
अप्रैल 2014 में इसी स्तर पर 40% से अधिक उछाल देखा गया।
अप्रैल 2009 में रेश्यो गिरने के बाद 70% तक की तेजी दर्ज हुई।
यह ट्रेंड बताता है कि गोल्ड की मजबूती के बाद निवेशक रिस्क एसेट्स की ओर लौटते हैं। 2025-2026 में गोल्ड ने निफ्टी को काफी पीछे छोड़ दिया, जहां गोल्ड ने 50-90% तक रिटर्न दिए जबकि निफ्टी सिर्फ 10-20% के आसपास रहा। इससे रेश्यो निचले स्तर पर पहुंचा, जो इक्विटी में वैल्यूएशन आकर्षक होने का संकेत है।
वर्तमान आंकड़े (12 फरवरी 2026 के आसपास)
निफ्टी 50 स्तर: लगभग 25,800-25,950 के बीच।
गोल्ड प्राइस (MCX, 24 कैरेट प्रति 10 ग्राम): ₹1,58,000-1,58,500 के आसपास।
निफ्टी-गोल्ड रेश्यो: करीब 1.6-1.7 (जो 5 साल के निचले स्तर पर है)।
यह रेश्यो 1.5-2 के बीच पहुंचना इक्विटी के लिए ‘अंडरवैल्यूड’ जोन माना जाता है। पिछले दशक में यह स्तर कई बार टेस्ट हुआ और हर बार निफ्टी ने डबल-डिजिट रिटर्न दिए।
निवेश से पहले गणित समझें
रेश्यो का मतलब : निफ्टी-गोल्ड रेश्यो = निफ्टी इंडेक्स / (गोल्ड प्राइस प्रति ग्राम × 10)। कम रेश्यो = गोल्ड महंगा, स्टॉक्स सस्ते।
ऐतिहासिक पैटर्न :
रेश्यो < 2.5: औसतन 40-70% निफ्टी रैली (12-24 महीने में)।
रेश्यो > 4: इक्विटी महंगी, गोल्ड बेहतर परफॉर्म करता है।
2026 में क्या उम्मीद : अगर रेश्यो इसी स्तर पर बना रहा या थोड़ा और गिरा, तो निफ्टी में 20-50% तक उछाल संभव, खासकर अगर FII inflows बढ़े, DII खरीदारी जारी रही और ग्लोबल रिस्क ऑन मोड में आए।
रिस्क फैक्टर : जियोपॉलिटिकल टेंशन, इंटरेस्ट रेट कट्स, डॉलर की कमजोरी गोल्ड को सपोर्ट कर सकती है। लेकिन अगर इकोनॉमिक रिकवरी हुई, तो फंड्स इक्विटी में शिफ्ट होंगे।
निवेश स्ट्रैटेजी के लिए की पॉइंट्स
एसेट एलोकेशन : 60-70% इक्विटी, 10-20% गोल्ड, बाकी डेट/कैश। कम रेश्यो पर गोल्ड से इक्विटी में शिफ्ट करें।
एंट्री टाइमिंग : SIP जारी रखें, लंपसम के लिए डिप्स का इंतजार करें।
सेक्टर फोकस : बैंकिंग, IT, FMCG जैसे मजबूत फंडामेंटल वाले सेक्टर पहले रिकवर हो सकते हैं।
रिस्क मैनेजमेंट : स्टॉप लॉस यूज करें, पोर्टफोलियो डायवर्सिफाई रखें।
यह रेश्यो ब्रेकआउट निवेशकों के लिए बड़ा संकेत है। अगर ट्रेंड 5 साल पुराना टूटा है, तो शेयर बाजार में बड़ी तेजी की संभावना मजबूत है, लेकिन धैर्य और कैलकुलेटेड अप्रोच जरूरी।
Disclaimer : यह न्यूज और एनालिसिस आधारित रिपोर्ट है। निवेश से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें। मार्केट रिस्की है।










