केंद्रीय मंत्रिमंडल ने स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 को मंजूरी दे दी है, जिसमें ₹10,000 करोड़ का कोष होगा। यह फंड मुख्य रूप से डीप-टेक, हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और अर्ली-ग्रोथ स्टेज स्टार्टअप्स को लक्षित करेगा, जो लंबी अवधि के पेशेंट कैपिटल की जरूरत रखते हैं। पहले चरण (FFS 1.0) में ₹10,000 करोड़ से 1,370+ स्टार्टअप्स में ₹25,500 करोड़ से अधिक निवेश हुआ था। नया फंड घरेलू वेंचर कैपिटल को मजबूत करेगा, प्राइवेट निवेश को आकर्षित करेगा और उच्च-गुणवत्ता वाली नौकरियां पैदा करेगा, जिससे भारत ग्लोबल इनोवेशन हब बनेगा।
स्टार्टअप को ₹10000 करोड़ का बूस्टर ‘डोज’, क्या बदलेगा इंडिया का डीप-टेक गेम? समझें पूरा प्लान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 (Startup India FoF 2.0) को मंजूरी प्रदान की है। इस योजना के तहत कुल ₹10,000 करोड़ का कोष स्थापित किया जाएगा, जिसका मुख्य उद्देश्य देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए वेंचर कैपिटल जुटाना है। यह फंड स्टार्टअप इंडिया पहल के अगले चरण को रफ्तार देगा, जहां फोकस डीप-टेक और कैपिटल-इंटेंसिव क्षेत्रों पर होगा।
2016 में लॉन्च हुई स्टार्टअप इंडिया पहल से अब तक DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या 500 से बढ़कर 2 लाख से अधिक हो चुकी है। 2025 में स्टार्टअप रजिस्ट्रेशन का रिकॉर्ड स्तर देखा गया। पहले फंड ऑफ फंड्स (FFS 1.0) ने पूरे ₹10,000 करोड़ को 145 अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) में कमिट किया, जिन्होंने 1,370 से ज्यादा स्टार्टअप्स में ₹25,500 करोड़ से अधिक का निवेश किया। ये निवेश AI, रोबोटिक्स, क्लीन टेक, स्पेस टेक, बायोटेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, फिनटेक और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में हुए।
FoF 2.0 में टारगेटेड और सेगमेंटेड फंडिंग अप्रोच अपनाई जाएगी। मुख्य फोकस क्षेत्र इस प्रकार हैं:
डीप-टेक स्टार्टअप्स : ब्रेकथ्रू टेक्नोलॉजीज जैसे क्वांटम, एडवांस्ड मटेरियल्स, AI-ड्रिवन सॉल्यूशंस, बायोटेक और रोबोटिक्स में लंबी अवधि के निवेश की जरूरत होती है। इन क्षेत्रों में रिस्क अधिक लेकिन इम्पैक्ट बड़ा होता है।
टेक-ड्रिवन इनोवेटिव मैन्युफैक्चरिंग : हाई-टेक प्रोडक्शन और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग स्टार्टअप्स को प्राथमिकता, जो आत्मनिर्भर भारत को मजबूत करेंगे।
अर्ली-ग्रोथ स्टेज स्टार्टअप्स : छोटे फंड्स के माध्यम से शुरुआती चरण के फाउंडर्स को सपोर्ट, ताकि फंडिंग की कमी से फेलियर कम हो।
सेक्टर/स्टेज एग्नॉस्टिक स्टार्टअप्स : सभी क्षेत्रों और चरणों में इनोवेशन को बढ़ावा।
इस फंड में ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी होगी, जैसे डीप-टेक और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग AIFs में सरकार का योगदान बढ़ाया जा सकता है। इससे पेशेंट कैपिटल को प्रोत्साहन मिलेगा और लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टिंग कल्चर बनेगा।
FoF 2.0 का प्रभाव:
| क्षेत्र | अपेक्षित प्रभाव |
|---|---|
| वेंचर कैपिटल इकोसिस्टम | घरेलू पूंजी बढ़ेगी, प्राइवेट इन्वेस्टमेंट क्राउड-इन होगा |
| जॉब क्रिएशन | हाई-क्वालिटी जॉब्स में वृद्धि, खासकर टेक और मैन्युफैक्चरिंग में |
| इनोवेशन हब | भारत को ग्लोबल इनोवेशन हब बनाने में मदद, विकसित भारत@2047विजन से जुड़ा |
| नॉन-मेट्रो क्षेत्र | इनोवेशन का प्रसार, मेट्रो से बाहर भी फंडिंग पहुंचेगी |
| रिस्क मिटिगेशन | अर्ली-स्टेज फेलियर कम होगा, हाई-रिस्क प्रोजेक्ट्स को सपोर्ट मिलेगा |
यह योजना FFS 1.0 की सफलता पर आधारित है, जहां पहले फंड ने डोमेस्टिक VC मार्केट को कैटेलाइज किया। अब FoF 2.0 डीप-टेक गेम-चेंजर साबित हो सकता है, क्योंकि डीप-टेक स्टार्टअप्स को आमतौर पर ग्लोबल फंडिंग में चुनौतियां आती हैं। इससे इंडियन स्टार्टअप्स ग्लोबली कॉम्पिटिटिव टेक्नोलॉजीज, प्रोडक्ट्स और सॉल्यूशंस बना सकेंगे।
फंड से मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं में बूस्ट, इकोनॉमिक रेजिलिएंस मजबूत होगी और हाई-इम्पैक्ट जॉब्स बढ़ेंगे।
Disclaimer: यह न्यूज रिपोर्ट आधारित है। निवेश संबंधी निर्णय से पहले विशेषज्ञ सलाह लें।










