ट्रंप प्रशासन द्वारा भारत से सोलर इंपोर्ट पर 126% प्रीलिमिनरी ड्यूटी लगाए जाने के बाद Waaree Energies के शेयर एक झटके में 15% तक गिर गए। कंपनी ने स्पष्ट किया कि उसके अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी से प्रभाव सीमित रहेगा, जिसके बाद शेयरों में तेज रिकवरी देखी गई और नुकसान 10-11% तक सिमट गया। यह घटना भारतीय सोलर सेक्टर के लिए अमेरिकी बाजार की चुनौतियों को उजागर करती है।
ट्रंप के एलान से Waaree Energies शेयरों में भारी गिरावट, फिर रिकवरी
अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने 24 फरवरी को भारत, इंडोनेशिया और लाओस से सोलर सेल्स और पैनल्स पर काउंटरवेलिंग ड्यूटी (CVD) लगाने का प्रीलिमिनरी फैसला सुनाया। भारत के लिए यह दर 125.87% (लगभग 126%) तय की गई, जिसका मकसद कथित सरकारी सब्सिडी के कारण भारतीय उत्पादकों द्वारा अमेरिकी बाजार में कम कीमत पर बिक्री को रोकना है।
इस घोषणा के तुरंत बाद भारतीय शेयर बाजार में सोलर कंपनियों पर भारी बिकवाली का दबाव देखा गया। Waaree Energies के शेयर NSE पर 15% तक गिरकर ₹2,591 के स्तर तक पहुंच गए, जबकि पिछले क्लोज ₹3,023.50 के आसपास था। Premier Energies के शेयर 10% लोअर सर्किट पर पहुंचे और Vikram Solar में भी 7-8% की गिरावट दर्ज की गई।
Waaree Energies के शेयरों में यह गिरावट कंपनी के अमेरिकी बाजार में मजबूत एक्सपोजर के कारण सबसे ज्यादा रही। भारत से अमेरिका में सोलर एक्सपोर्ट 2022 से 2024 तक 9 गुना बढ़कर $792.6 मिलियन पहुंच गया था, और Waaree जैसी कंपनियां इस ग्रोथ में प्रमुख भूमिका निभा रही हैं।
कंपनी ने तुरंत सफाई देते हुए कहा कि यह ड्यूटी मुख्य रूप से भारत में बने सोलर सेल्स और पैनल्स पर लागू होती है, लेकिन कंपनी की अमेरिका में बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी से प्रभाव न्यूनतम रहेगा। Waaree Energies के पास अमेरिका में वर्तमान में 2.6 GW की कैपेसिटी है, जो जल्द ही 4.2 GW तक बढ़ाई जाएगी। कंपनी ने बताया कि उसकी सप्लाई चेन विविध है और अमेरिकी बाजार से होने वाली आय का बड़ा हिस्सा लोकल प्रोडक्शन से सुरक्षित रहेगा।
इस स्पष्टीकरण के बाद शेयरों में तेज रिकवरी देखी गई। Waaree Energies के शेयर सेशन लो से उछलकर 10-11% की गिरावट पर ट्रेड करने लगे, जबकि Premier Energies ने भी लोअर सर्किट से रिकवर करते हुए नुकसान कम किया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह ड्यूटी अमेरिकी घरेलू मैन्युफैक्चरर्स को फायदा पहुंचाएगी, लेकिन भारतीय कंपनियों के लिए नए एक्सपोर्ट मार्केट जैसे यूरोप और अफ्रीका की तलाश जरूरी हो गई है।
प्रभावित कंपनियों की स्थिति (इंट्राडे ट्रेडिंग)
Waaree Energies: अधिकतम गिरावट 15%, रिकवरी के बाद लगभग 10-11% नीचे
Premier Energies: 10% लोअर सर्किट, बाद में 6-7% की गिरावट
Vikram Solar: 7-8% तक की गिरावट
कंपनी की अमेरिकी रणनीति
Waaree Energies ने अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने पर फोकस किया है, ताकि ड्यूटी से बचाव हो सके। कंपनी का दावा है कि लोकल प्रोडक्शन से वह अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धी बनी रहेगी। अन्य कंपनियां भी इसी दिशा में कदम उठा रही हैं, लेकिन अल्पावधि में एक्सपोर्ट प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।
यह घटना भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में नई चुनौती पेश करती है, जहां सोलर सेक्टर तेजी से उभर रहा था। भारतीय सोलर मैन्युफैक्चरर्स अब घरेलू बाजार और वैकल्पिक एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन पर ज्यादा निर्भर हो सकते हैं।
Disclaimer: यह लेख बाजार की वर्तमान घटनाओं पर आधारित है और निवेश सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है।










