“भारत के टू-व्हीलर बाजार में मोटरसाइकिलों का दबदबा बरकरार है, जहां वे कुल बिक्री का लगभग 61-65% हिस्सा रखती हैं, जबकि इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की कुल बाजार हिस्सेदारी 6.3% तक पहुंच गई है। हालांकि, इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिलें कुल टू-व्हीलर बिक्री का महज 0.1% हैं, जबकि इलेक्ट्रिक स्कूटरों में यह हिस्सा काफी बेहतर है। PLI स्कीम के बावजूद उच्च लागत, जटिल R&D और प्राइस-सेंसिटिव ग्राहक आधार मुख्य रुकावट बने हुए हैं।”
टू-व्हीलर बाजार में मोटरसाइकिलों का दबदबा और इलेक्ट्रिक बाइकों की कमजोर पकड़
भारत का टू-व्हीलर बाजार 2025 में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, जहां कुल बिक्री 20.29 मिलियन यूनिट्स रही। इसमें मोटरसाइकिलों का हिस्सा 61% रहा, जबकि स्कूटरों ने 37% पर कब्जा किया। मोटरसाइकिलें ग्रामीण और लंबी दूरी की जरूरतों के लिए पसंद की जाती हैं, खासकर 110 cc से कम सेगमेंट में जहां 65% बिक्री केंद्रित है।
इसके विपरीत, इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों (e-2W) की कुल बिक्री 1.28 मिलियन यूनिट्स रही, जो कुल टू-व्हीलर बाजार का 6.3% है। यह आंकड़ा 2024 के 6.07% से थोड़ा बेहतर है, लेकिन इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिलों की स्थिति चिंताजनक है। NITI Aayog के अनुसार, इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिलें कुल टू-व्हीलर बिक्री का सिर्फ 0.1% हैं, जबकि इलेक्ट्रिक स्कूटरों में EV पेनेट्रेशन 13-15% तक पहुंच चुका है।
इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिलों की कम अपनाने की मुख्य वजहें
उच्च लागत और बैटरी की जटिलता : मोटरसाइकिलों में लंबी रेंज और हाई पावर की जरूरत होती है, जिसके लिए बड़ी बैटरी जरूरी है। इससे वाहन की कीमत ICE मोटरसाइकिलों से 20-50% ज्यादा हो जाती है। प्राइस-सेंसिटिव बाजार में यह बड़ा बाधा है।
जटिल R&D और तकनीकी चुनौतियां : इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिलों में हाई-स्पीड परफॉर्मेंस, बेहतर हैंडलिंग और ड्यूरेबिलिटी के लिए एडवांस्ड टेक्नोलॉजी चाहिए। बड़े OEMs ने इस सेगमेंट में कम निवेश किया है, जबकि स्कूटरों में अपनाना आसान रहा।
स्कूटरों का शहरी फोकस : इलेक्ट्रिक वाहन मुख्य रूप से शहरी कम्यूटिंग के लिए अपनाए जा रहे हैं, जहां स्कूटर ज्यादा सुविधाजनक हैं। मोटरसाइकिलें ग्रामीण और हाईवे यूज के लिए हैं, जहां चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर कमजोर है।
PLI स्कीम का प्रभाव: मदद या रुकावट?
PLI (Production Linked Incentive) स्कीम ऑटोमोबाइल और कंपोनेंट्स के लिए शुरू की गई, जिसने EV मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया। स्कीम से लाभान्वित कंपनियों को 13-16% लागत लाभ मिला, जिससे वे आक्रामक प्राइसिंग और स्केल-अप कर सके। हालांकि, यह स्कीम मुख्य रूप से अप्रूव्ड मॉडल्स पर फोकस्ड है, जिससे नॉन-PLI मैन्युफैक्चरर्स की ग्रोथ -33% तक गिर गई।
PLI ने स्कूटर-डोमिनेटेड e-2W सेगमेंट को मजबूत किया, लेकिन मोटरसाइकिल सेगमेंट में निवेश कम रहा। कई लाभार्थी कंपनियां इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिलों के जटिल R&D से दूर रहीं, जिससे सेगमेंट में पेनेट्रेशन सिर्फ 0.1% पर अटका रहा। स्कीम ने बाजार को रीशेप किया, लेकिन इलेक्ट्रिक बाइकों के लिए अपेक्षित बूस्ट नहीं दिया।
बाजार के प्रमुख आंकड़े (2025)
कुल टू-व्हीलर बिक्री: 20.29 मिलियन यूनिट्स
मोटरसाइकिल हिस्सा: 61% (करीब 12.48 मिलियन)
स्कूटर हिस्सा: 37%
e-2W कुल बिक्री: 1.28 मिलियन (6.3% पेनेट्रेशन)
इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल हिस्सा: 0.1%
प्रमुख खिलाड़ी: TVS (लगभग 299k e-2W), Bajaj, Ather; Ola में गिरावट
आगे की राह और संभावनाएं
इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिलों को बढ़ावा देने के लिए बैटरी लागत में और कमी, बेहतर रेंज वाली मॉडल्स और ग्रामीण चार्जिंग नेटवर्क जरूरी है। सरकार की PM E-DRIVE स्कीम और राज्य स्तर के इंसेंटिव्स मददगार साबित हो सकते हैं। अगर मोटरसाइकिल सेगमेंट में EV अपनाना बढ़ा, तो कुल e-2W पेनेट्रेशन 2030 तक 30% तक पहुंच सकता है। फिलहाल, स्कूटरों की सफलता से सबक लेकर इलेक्ट्रिक बाइकों को मुख्यधारा में लाना चुनौती बनी हुई है।
Disclaimer: यह लेख समाचार, बाजार विश्लेषण और उपलब्ध ट्रेंड्स पर आधारित है। निवेश या खरीद निर्णय से पहले विशेषज्ञ सलाह लें।










