“संघ बजट 2026 में एमएसएमई सेक्टर जीएसटी रिफॉर्म्स को मजबूत करने, ऑपरेशनल ईज बढ़ाने और निर्यात फाइनेंसिंग में सहायता की उम्मीद कर रहा है। 86% एमएसएमई को 2026 में जीएसटी सुधारों से बिजनेस ग्रोथ की उम्मीद है, जबकि सरकारी योजनाओं में क्रेडिट गारंटी कवर बढ़ाने और टैक्स सिम्प्लिफिकेशन की मांग प्रमुख है। बजट से एमएसएमई को कैपिटल फाइनेंस, लोन एक्सेस और यूएस टैरिफ चुनौतियों से निपटने के लिए स्पेशल स्कीम्स की अपेक्षा है, जो सेक्टर की प्रतिस्पर्धा और निर्यात को बढ़ावा देगी।”
एमएसएमई सेक्टर, जो भारत की अर्थव्यवस्था का बैकबोन है, संघ बजट 2026 से कई स्पेसिफिक मांगें कर रहा है। ये मांगें मुख्य रूप से जीएसटी रिफॉर्म्स को मजबूत करने, सरकारी योजनाओं में सुधार और फाइनेंसियल सपोर्ट पर केंद्रित हैं। सेक्टर के 86% उद्यमी मानते हैं कि जीएसटी सुधारों से 2026 में उनका बिजनेस ग्रोथ हासिल होगा, लेकिन इसके लिए बजट में ऑपरेशनल ईज और कंटिन्यूइटी सुनिश्चित करने वाले कदम जरूरी हैं।
एमएसएमई की चुनौतियां बढ़ रही हैं, खासकर यूएस टैरिफ्स के कारण, जहां भारत के निर्यात का बड़ा हिस्सा एमएसएमई से आता है। बजट से उम्मीद है कि वर्किंग कैपिटल रिक्वायरमेंट्स को आसान बनाने और एक्सपोर्ट फाइनेंसिंग के लिए स्पेशल मेजर्स लिए जाएं। उद्योग अध्ययनों के अनुसार, एमएसएमई को कैपिटल फाइनेंस और लोन ऑपरेशंस में ईज की जरूरत है, जो जीएसटी रिफॉर्म्स को सपोर्ट करे।
एमएसएमई की प्रमुख मांगें: एक नजर में
एमएसएमई सेक्टर बजट से टार्गेटेड सपोर्ट चाहता है, जो उनकी ग्रोथ को बूस्ट करे। यहां कुछ मुख्य अपेक्षाएं हैं:
जीएसटी रिफॉर्म्स में रेशनलाइजेशन: हैंडक्राफ्टेड ज्वेलरी पर जीएसटी को रेशनलाइज करने की मांग, जहां कंप्लायंस नॉर्म्स में क्लैरिटी बढ़ाई जाए। इससे छोटे उद्यमियों को राहत मिलेगी और बिजनेस कॉस्ट घटेगी।
क्रेडिट एक्सेस में सुधार: एमएसएमई के लिए क्रेडिट गारंटी कवर को मौजूदा 5 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ करने की अपेक्षा, जो बैंक और एनबीएफसी से लोन लेने को आसान बनाएगा।
निर्यात सपोर्ट: यूएस मार्केट में टैरिफ चुनौतियों से निपटने के लिए स्पेशल स्कीम्स, जैसे एक्सपोर्ट फाइनेंसिंग में सब्सिडी या ईज ऑफ डूइंग बिजनेस इनिशिएटिव्स को तेज करना।
टैक्स सिम्प्लिफिकेशन: इनडायरेक्ट टैक्स में स्टेबिलिटी, जहां जीएसटी 2.0 के तहत रेट स्ट्रक्चर्स को सिम्प्लिफाई किया जाए, खासकर छोटे बिजनेस के लिए कंप्लायंस बोझ कम करने पर फोकस।
डिजिटल एडॉप्शन इंसेंटिव्स: एमएसएमई को डिजिटल रिटेंशन टूल्स अपनाने के लिए इंसेंटिव्स, जो लॉयल्टी प्रोग्राम्स को छोटे बिजनेस के लिए एक्सेसिबल बनाएंगे।
ये मांगें सेक्टर की प्रोडक्टिविटी और कॉम्पिटिटिवनेस को बढ़ाने पर आधारित हैं, जहां बजट से एमएसएमई क्रेडिट पेनेट्रेशन को पॉलिसी सपोर्ट के जरिए अनलॉक करने की उम्मीद है।
जीएसटी रिफॉर्म्स: उम्मीदें और प्रभाव
जीएसटी रिफॉर्म्स एमएसएमई की उम्मीदों का केंद्र बिंदु हैं। सेक्टर चाहता है कि बजट में जीएसटी पर स्पेसिफिक सेक्टर्स में रेट मिसमैच को एड्रेस किया जाए, जैसे रियल एस्टेट से जुड़े जीएसटी इश्यूज में क्लैरिटी। इसके अलावा, लिगेसी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) मिसमैच को रिजॉल्व करने और जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल को तेजी से ऑपरेशनलाइज करने की मांग है।
एक इंडस्ट्री स्टडी के मुताबिक, 86% एमएसएमई जीएसटी रिफॉर्म्स से ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन कंप्लायंस नॉर्म्स में क्लैरिटी की कमी एक बड़ी बाधा है। बजट से अपेक्षा है कि रिटर्न फॉर्मेट्स को स्टेबल बनाया जाए और छोटे बिजनेस के लिए सिंगल-विंडो क्लियरेंस सिस्टम को फास्टर किया जाए। इससे प्रोजेक्ट वायबिलिटी बढ़ेगी और इनवेस्टर कॉन्फिडेंस मजबूत होगा।
जीएसटी रेशनलाइजेशन से सेक्टर्स जैसे जेम्स एंड ज्वेलरी को फायदा होगा, जहां टैक्स स्टेबिलिटी और रेशनल टैक्सेशन से कॉस्ट एफिशिएंसी आएगी। एमएसएमई के लिए यह रिफॉर्म्स ग्रोथ को कैटेलाइज करेंगे, खासकर जब इन्फ्लेशन कंट्रोल्ड है और जीडीपी मोमेंटम मजबूत।
सरकारी योजनाओं में सुधार: क्या-क्या बदलाव चाहिए?
एमएसएमई सरकारी योजनाओं से ज्यादा प्रभावी सपोर्ट चाहते हैं। मौजूदा स्कीम्स जैसे क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज (CGTMSE) में कवरेज बढ़ाने की मांग है, जो एमएसएमई को जोखिम से बचाएगा। बजट से अपेक्षा है कि एमएसएमई ग्रोथ और टैक्स रिलीफ के लिए स्पेसिफिक प्रावधान किए जाएं, जैसे न्यू एज सेक्टर्स जैसे AI और क्लीन टेक में सपोर्ट।
| योजना | मौजूदा स्थिति | अपेक्षित सुधार |
|---|---|---|
| CGTMSE | 5 करोड़ तक कवर | 10 करोड़ तक बढ़ाना, एमएसएमई क्रेडिट गैप को भरने के लिए |
| PMEGP | एम्प्लॉयमेंट जनरेशन | सब्सिडी रेट बढ़ाना और डिजिटल इंटीग्रेशन जोड़ना |
| ECLGS | इमरजेंसी क्रेडिट लाइन | यूएस टैरिफ प्रभावित एमएसएमई के लिए एक्सटेंडेड वैलिडिटी |
| MUDRA | माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट | लोन लिमिट बढ़ाना और महिलाओं/स्टार्टअप्स के लिए स्पेशल कोटा |
| ZED Certification | क्वालिटी प्रमोशन | फंडिंग बढ़ाना और जीएसटी कंप्लायंस से लिंक करना |
ये सुधार एमएसएमई की कैपिटल एक्सपेंडिचर को सपोर्ट करेंगे, जहां पॉलिसी सपोर्ट से क्रेडिट-इनेबलिंग फ्रेमवर्क्स मजबूत होंगे। सेक्टर के विशेषज्ञों का मानना है कि बजट से एमएसएमई को मैन्युफैक्चरिंग आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम उठाने चाहिए, जैसे लेबर रिफॉर्म्स और इन्फ्रास्ट्रक्चर चैलेंजेस को एड्रेस करना।
निर्यात और फाइनेंसियल सपोर्ट: चुनौतियां और समाधान
एमएसएमई निर्यात में यूएस टैरिफ्स से प्रभावित हैं, जहां एक्सपोर्ट बास्केट का बड़ा हिस्सा एमएसएमई से आता है। बजट से स्पेशल स्कीम्स की उम्मीद है, जैसे वर्किंग कैपिटल ईज और एक्सपोर्ट फाइनेंसिंग में राहत। आरबीआई और सरकार के मौजूदा मेजर्स को मजबूत करने के लिए बजट में आगे सपोर्ट की जरूरत है, जो एमएसएमई की रेजिलिएंस बढ़ाएगी।
फाइनेंसियल सेक्टर से अपेक्षा है कि बजट में डिपॉजिट रिलीफ और एमएसएमई क्रेडिट सपोर्ट के लिए स्ट्रक्चरल पॉलिसी लाई जाएं। बैंक और एनबीएफसी स्लोइंग डिपॉजिट ग्रोथ और राइजिंग फंडिंग कॉस्ट्स से जूझ रहे हैं, इसलिए बजट से क्रेडिट गैप्स को भरने वाले कदम चाहिए। एमएसएमई को जॉब सिक्योरिटी, स्किल डेवलपमेंट और सप्लाई चेन इश्यूज पर फोकस चाहिए, जो सेक्टर की ओवरऑल ग्रोथ को बूस्ट करे।
अन्य सेक्टर्स में इंटीग्रेशन: एमएसएमई की भूमिका
एमएसएमई को बजट से ग्रीन एनर्जी और न्यू एज सेक्टर्स में आरएंडडी सपोर्ट की उम्मीद है, जहां सीबीजी पुश और ईजियर क्लियरेंसेज से एमएसएमई भागीदारी बढ़ेगी। एजुकेशन सेक्टर में जीएसटी रेशनलाइजेशन से डिजिटल लर्निंग प्रोग्राम्स अफोर्डेबल होंगे, जो एमएसएमई के स्किल डेवलपमेंट को सपोर्ट करेगा।
कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और रिटेल में टैक्स सिम्प्लिफिकेशन से एमएसएमई की रिटेल एक्टिविटीज बूस्ट होंगी, जहां मिडिल क्लास और एंटरप्रेन्योर्स के लिए टार्गेटेड रिलीफ से कंजम्प्शन बढ़ेगा। बजट से अपेक्षा है कि एमएसएमई को इनोवेशन-ड्रिवन रिफॉर्म्स और टैक्स सिम्प्लिफिकेशन से डिस्प्यूट्स कम किए जाएं, जो डोमेस्टिक बिजनेस को फायदा पहुंचाएगा।
एमएसएमई सेक्टर की ये अपेक्षाएं बजट को कॉम्पिटिटिवनेस और प्रोडक्टिविटी पर फोकस करने का अवसर देती हैं, जहां लॉन्ग-टर्म फिस्कल रेजिलिएंस सुनिश्चित होगी।
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